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वन विभाग का कारनामा: अपने बॉस की जांच करेंगे अधीनस्थ कर्मचारी… जानबूझकर अधिकारी को नीचा दिखाने या मामला दबाने के लिए? दलदल में फंसकर मरी मादा हाथी के जाँच मामले में निकाला गया अनोखा आदेश…

ब्यास मुनि द्विवेदी, रायपुर, 13 जनवरी 2020. कटघोरा वन मंडल के कटघोरा वन परिक्षेत्र के गांव कुलहरिया में 36 घंटे तक दलदल के कीचड़ में फंसने के कारण तड़प-तड़प कर 27 दिसंबर को मादा हाथी की हुई मृत्यु के लिए बनाई गई जांच समिति बनते ही विवादों के घेरे में आ गई है.

बता दें कि मादा हाथी की मृत्यु के पश्चात मीडिया के दबाव के कारण कटघोरा वनमंडल के प्रभारी वनमंडल अधिकारी को 28 दिसंबर को निलंबित करते हुए शासन ने भारतीय वन सेवा के पी. के. केसर, मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) बिलासपुर और प्रदेश के वन्य जीव के मुखिया प्रधान मुख्य वन संरक्षक अतुल कुमार शुक्ला को अखिल भारतीय सेवा नियम 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही का नोटिस थमा दिया था.

अब शासन की तरफ से जो जांच आदेश जारी किया गया है उसमें जांच हेतु एक समिति गठित की गई है जिसमें एस. के. सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अध्यक्ष होंगे उसके साथ-साथ कौशलेंद्र कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी और प्रेम कुमार मुख्य वन संरक्षक (सतर्कता/ शिकायत) समिति के सदस्य होंगे।

इस समिति के अध्यक्ष और एक सदस्य दोनों अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) है. वे दोनों प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अतुल शुक्ला के अधीन कार्यरत है एक कनिष्ठ मुख्य वन संरक्षक तीसरे सदस्य हैं. ऐसे में समिति को उस मामले में जांच करनी पड़ेगी जिसमें उनके ही बॉस (मुखिया) को नोटिस मिल चुका है.

विभाग में 5 प्रधान मुख्य संरक्षक मौजूद और फिर भी जाँच जूनियर को
बता दें कि वन विभाग में वर्तमान में 5 प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुदित कुमार सिंह, राकेश चतुर्वेदी, अतुल शुक्ला, संजय शुक्ला और राजेश गोवर्धन मौजूद हैं फिर भी इनमें से एक प्रधान मुख्य वन संरक्षक के खिलाफ जांच का जिम्मा कनिष्ठ अधिकारीयों को दिया जाना अब सवाल खड़ा कर दिया है. इस तरह करने के पीछे क्या वजह है? क्या एक उच्च अधिकारी को निचा दिखाना जिसमे उनके कनिष्ठ ही उनसे सवाल पूछें? या फिर जाँच की लीपापोती करना? पारदर्शिता के लिए सेवानिवृत्त अधिकारी से भी जांच कराई जा सकती थी.

आश्चर्यजनक: जाँच के नहीं तय किये गए बिंदु
जानकार कह रहे हैं कि जो जांच के आदेश जारी किए गए हैं वह अपने आप में अपूर्ण है जांच आदेश में जांच के बिंदु ही निर्धारित नहीं किए गए हैं जबकि जांच के विस्तृत बिंदु जैसे कि किन परिस्थितियों में मादा हथनी दलदल में फंसी? वह दलदल प्राकृतिक था या मानव निर्मित गतिविधियों से बना था? मादा हाथी को बचाने के लिए किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों को क्या क्या कार्यवाही करनी थी? किन-किन लोगों से सहयोग लेना था? कमियां बताते हुए भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुझाव भी दिए जाने के लिए निर्देश दिए जाने चाहिए थे.

अब विभाग के अधिकारी ही दबी जवान बात कर रहे हैं कि नोटिस और जांच आदेश खाली खानापूर्ति करने के लिए जारी किए गए हैं बाकी नतीजे तो बिना परीक्षा के बाहर आ गए हैं

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