बैकुंठपुर (कोरिया) 30नवंबर।

विश्व एड्स दिवस हर साल 1 दिसंबर को मनाया जाता है। इस वर्ष इसकी थीम ‘एचआईवी / एड्स महामारी समाप्त: समुदाय से समुदाय तक’ (World Aids Day Theme  2019 –  Ending the HIV/AIDS Epidemic: Community by Community है।

विश्व एड्स दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य विश्व स्तर पर एड्स के लिए रोकथाम और नियंत्रण के उपायों को बढ़ाने के लिए,  एड्स के इलाज,  परीक्षण, तथा एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी के लिये तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना तथा लोगो को एड्स के  प्रति जागरूक करके इसके खिलाफ लड़ने में सहायता के साथएएचआईवी संक्रमण की वजह से होने वाली महामारी एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

सीएमएचओ डां रामेश्वर शर्माने बताया एड्स के प्रति लोगो के मन व्यापत भ्रांति को हटाकर एड्स की जानलेवा बीमारी के लक्षणों के प्रति जागरुक करना है, जिससे की लोग इसके विषय में सचेत हो सकें और यह बीमारी जड़ से मिट सके।

नोडल अधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया जिले में एड्स दिवस के अवसर पर जागरूकता रैली का आयोजन किया जाएगा | यह रैली जिला अस्पताल से प्रातः 9बजे निकाली जाएगी जो शहर के प्रमुख चैक चैराहों से होते हुए वापस जिला अस्पताल में आकर खत्म होगी| एड्स को लेकर जिले के सभी स्कूल कॉलेजों मे भी भाषण एवं वाद विवाद प्रतियोगिता का  आयोजन भी होगा ।

एचआईवी क्या है, जानिए

एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियंसी वायरस हमारे इम्यून सिस्टम पर असर डालता है। इसके कारण शरीर किसी अन्य रोग के संक्रमण को रोकने की क्षमता खोने लगता है। वहीं एड्स एचआईवी संक्रमण का अगला चरण माना जाता है। शरीर का बैक्टीरिया वायरस से मुकाबला करने की क्षमता खोने लगता है। जिससे शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है। शरीर प्रतिरोधक क्षमता आठ-दस सालों में ही न्यूनतम हो जाती है। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है। एड्स वायरस को रेट्रोवायरस कहा जाता है।

इन वजहों से होता है एड्स

संक्रमित खून चढ़ाने से ,HIV पॉजिटिव महिला के बच्चे में,एक बार इस्तेमाल की जानी वाली सुई को दूसरी बार यूज करने से,इन्फेक्टेड ब्लेड यूज करने से

 

एचआईवी/एड्स होने के लक्षण में प्रमुख रूप से  बुखार,पसीना आना,ठंड लगना,थकान,भूख कम लगना,वजन घटा,उल्टी आना,गले में खराश रहना,दस्त होना,खांसी होना,सांस लेने में समस्या,शरीर पर चकत्ते होना,स्किन प्रॉब्लम आदि है।

एनएफएचएस- 4 के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में एड्स जागरूकता के मामले मे 81% से अधिक महिलाओं ने एचआईवी एड्स के बारे में सुना है जिसमें से 93%शहरी क्षेत्र जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 70% महिलाएं इस बारे में जानती हैं| बड़ी उम्र की महिलाएं 40-49 वर्ष कम उम्र (74%) की तुलना में कम उम्र की महिलाओं में 15-24 (85%) एचआईवी के बारे में सुना है । बिना स्कूली शिक्षा (63%) और बिना मास मीडिया एक्सपोज़र (59%) वाली महिलाएँ हैं अन्य महिलाओं की तुलना में एड्स की संभावना कम है जबकि पुरुषों (92%)  में एचआईवी या एड्स के बारे में सुना है, जिसमें शहरी क्षेत्रों में 97 % और 99 %  शामिल हैं कम से कम 12 साल की स्कूली शिक्षा वाले। रोकथाम और संचरण का ज्ञान पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक  है|

 

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