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exclusive: असम से लाए जा रहे वन भैंसों का मालिक कौन? पिक्चर का सस्पेंस बरकरार, वर्ष 2020 का सबसे इंटरेस्टिंग मामला….

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संदीप तिवारी, 12 फरवरी 2020, छत्तीसगढ़ में 5 मादा वन भैंसों को लाने के लिए वन विभाग की टीम असम रवाना हो गई है। परंतु वन भैंसों को लेकर वैसा ही सस्पेंस बरकरार है जैसे कि पुराने जमाने की रामसे ब्रदर्स की पिक्चर में होता था। अब यह सस्पेंस संभवतः वन भैंसों के छत्तीसगढ़ आने के पश्चात शायद खुल जाए।

वर्ष 2020 का सबसे इंटरेस्टिंग मामला
पूरा मामला बहुत इंटरेस्टिंग है. हो सकता है वर्ष 2020 का सबसे इंटरेस्टिंग मामला हो। हुआ यूं कि सूचना के अधिकार के तहत एक आवेदन लगाया गया जिसमें पूछा गया कि छत्तीसगढ़ में असम से वन भैंसों के लाने से संबंधित समस्त पत्राचारो की प्रतियां प्रदान करें। वन विभाग के मुख्यालय ने जवाब दिया कि इस प्रकार का कोई पत्राचार नहीं हुआ. प्रथम अपील में बताया गया कि आवेदक ने कौन से वन भैंसे लाने का पत्राचार मांगा है, यह उल्लेख नहीं किया है. वन भैंसा किसका है? पालतू है या जंगली है, यह भी नहीं बताया गया है। आवेदक ने यह भी नहीं बताया कि वन भैंसा असम में कहां रखा हुआ है जिसे लाना है। कार्यालय की नस्ती में ऐसा कोई वन भैंसा से संबंधित पत्राचार नहीं हुआ है। प्रथम अपील अधिकारी कौशलेंद्र कुमार ने अपील बंद कर दी।

वन विभाग मुख्यालय का जवाब मिलने के पश्चात एक दूसरा आवेदन लगाया गया जिसके तहत पूछा गया कि भारत के असम राज्य से लाए जाने वाले जंगली वन भैंसे चाहे वह पालतू वन भैंसे हो चाहे जंगली वन भैंसे हो चाहे नर वन भैंसे हो चाहे वह मादा नर भैंसे हो, चाहे वह असम में किसी के घर में रखा हुआ वह चाहे वह असम के किसी वन क्षेत्र में हो, चाहे उसे ट्रेन से लाना जाना प्रस्तावित हो या ट्रक से या हवाई जहाज से या पैदल या किसी अन्य साधन द्वारा लाया जाना प्रस्तावित हो, चाहे वह अफ्रीकन वन भैंसा हो या एशियाटिक हो चाहे, वह काले रंग का हो चाहे सफेद, चाहे वह किसी महिला के पास हो या किसी आदमी के, चाहे वह कैलाश के पास हो या गणेश के या किसी के भी पास हो, वन भैंसा किसी भी उम्र का हो, से संबंधित समस्त समस्त नस्तीयो का अवलोकन कराने का कष्ट करें। गौर करेंगे कि वन भैंसों को लाए जाने से संबंधित नस्तीयो के अवलोकन हेतु आवेदन लगाया गया था।

क्या वजह है कि वन विभाग भैसों से सम्बंधित कोई खुलासा नहीं करना चाहता?
वन विभाग वन भैंसों से संबंधित कोई भी खुलासा नहीं करना चाहता. इसके लिए बताया जाता है कि संबंधित विभाग प्रमुख ने सूचना देने से मना कर रखा है ताकि कोई विघ्न पैदा ना हो और वन भैंसा लाकर राजनेताओं के सामने क्रेडिट कमाए जा सके। प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ वन विभाग असम के मानस नेशनल पार्क से पांच मादा वन वन भैंसों को ब्रीडिंग कराने के लिए छत्तीसगढ़ ला रहा है जहां के बार नवापारा के बाडो में उदंती, सीतानाडी से नर वन भैंसों को लाकर ब्रीडिंग कराई जाएगी।

हास्यास्पद: जन सूचना अधिकारी ने राज्य सूचना आयोग से मांगा मार्गदर्शन
सूचना न मिलने पर दूसरे आवेदन पर भी प्रथम अपील दायर की गई तब खुलासा हुआ कि वन विभाग ने सूचना आयोग को पत्र लिखकर के मार्गदर्शन मांगा कि ऐसे आवेदन में क्या करना है? और इसलिए आवेदक को समय पर जवाब नहीं दिया जा सका. सूचना नहीं देने के लिए नया पेच मारा गया, अपील आदेश में उल्लेखित है कि आवेदक के आवेदन में जंगली वन भैंसों के स्वामी का उल्लेख नहीं किया गया है। जब उसके स्वामी का उल्लेख नहीं किया गया है तो असम राज्य के वन भैंसों जो छत्तीसगढ़ शासन के अधिकार में नहीं है उनकी जानकारी छत्तीसगढ़ शासन का वन विभाग कैसे दे सकता है और उसका पत्राचार वन विभाग के पास क्यों हो सकता है? वन भैंसे के स्वामी का उल्लेख नहीं होने के कारण कोई निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है। हास्यास्पद जवाब देते हुए लिखा है कि आवेदक चाहे तो इसकी जानकारी असम राज्य के संबंधित वन भैंसे के स्वामी से जानकारी प्राप्त कर सकता है। कहते हुए अपील अधिकारी कौशलेंद्र कुमार ने अपील नस्ती बंद कर दी।

आईएफएस अधिकारी का जवाब देख सर पकड़ लिया आवेदक
जन सूचना अधिकारी पंकज राजपूत (आईएफएस) का जवाब देख आवेदक सर पकड़ कर बैठ गया है कि उसने असम से लाए जाने वाले वन भैंसों से संबंधित समस्त नस्तीयों का अवलोकन करने के लिए आवेदन लगाया था परंतु अब वह असम में वन भैंसों के स्वामी का नाम ढूंढने में लग गया है इसके लिए वह हवन भी करा रहा है और तांत्रिकों से भी मिल रहा है ताकि जंगल में घूम रहे वन भैंसों के स्वामी का नाम पता लगा सके और बाद में जंगली वन भैंसों के स्वामी का नाम पता लगते ही वन भैंसों के संबंध मैं पत्राचार प्राप्त कर सके और वन विभाग में दोबारा वन भैंसों के स्वामी के नाम के साथ नस्तीयो के अवलोकन के लिए आवेदन लगा सके। बड़ी हास्यास्पद बात है कि एक आईएफएस अधिकारी जो सूचना देने के लिए राज्य सूचना आयोग से मार्गदर्शन मांग रहा हो, वह क्या सूचना का अधिकार एक्ट नहीं पढ़ा होगा कि किस धारा के तहत ऐसा करने की अनुमति है.

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