Sat. Feb 29th, 2020

Suyash Gram

मासिक पत्रिका एवं वेब न्यूज़ पोर्टल

विशेष : दस वर्षीय गरीब दिव्यांग छात्रा ने मुख्यमंत्री को लिखा मार्मिक पत्र…… सीएम सर जी मुझे स्कूल जाना है…. करनी है पढ़ाई…. प्लीज हेल्प….. विद्यालय से छात्रा का नाम ही काट दिया ? पत्र हुआ सोशल मीडिया में वायरल

1 min read

रितेश तिवारी, दुर्ग, 13 फ़रवरी 2020. मुख्यमंत्री के गृह जिला दुर्ग से एक 10 वर्षीय दिव्यांग बच्ची ने अपने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बड़ी मार्मिक अपील की है. एक दिव्यांग बेटी का हौसला देखिये वह पढ़ना चाहती है आगे बढ़ना चाहती है लेकिन हालत से मजबूर है.

जहां राज्य सरकार बेटी पढ़ाओ को लेकर गंभीर है तो वही उनके ही जिले में दस वर्षीय छात्रा विद्यालय जाने के लिए गुहार लगा रही है और जिम्मेदार मौन बैठे है। दुर्ग के बहुचर्चित श्री शंकाराचार्य विद्यालय हुडको भिलाई का पूरा मामला है जहा एक दस वर्षीय दिव्यांग छात्रा को पिछले तीन महीनो से मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है और इसके जिम्मेदार कोई और नहीं विद्यालय के प्राचार्य और संचालक है?

पहले किया फीस माफ़ अब मांग रहे पुरानी फीस
छात्रा अविका पाल के मुताबिक शुरू से ही शंकाराचार्य विद्यालय में पढ़ाई कर रही है. विद्यालय दाखिला के दौरान जो भी शुल्क था घरवालों ने जमा किया था और लगातार हर महीने फीस जमा कर रहे थे. लेकिन कक्षा तीसरी में पहुंचने के बाद वर्तमान प्राचार्य राजकुमार शर्मा ने आगे की पढ़ाई के लिए पूरी फीस माफ़ कर दिये थे। छात्रा के मुताबिक उसकी बड़ी बहन भी इसी विद्यालय में पढ़ाई कर रही है जिसकी पूरी फीस घरवाले जमा कर रहे है। अब स्कूल प्रबंधन माफ़ की हुई पुरानी फीस भी मांग रहा है. लेकिन पिता हैसियत इतने पैसे एक साथ चुकाने के हैं नहीं।

फीस के लिए अबोध बच्ची को करते रहे मानशिक प्रताड़ित प्रताड़ित।
नये प्राचार्य ने माफ़ की हुई पुरानी फीस 40 हजार 600 रूपए जमा करने के लिए लगातार दिव्यांग छात्रा पर दवाब बनाते रहे. यहाँ तक की छात्रा को क्लास रूम की जगह लाइब्रेरी रूम में दिन भर जबरन बैठाया जाता था। खुद सोचिये 10 साल की बच्ची की मानसिक पीड़ा क्या होती होगी की वह स्कूल पढ़ने जाती होगी और उसे सहपाठियों के सामने क्लास से बहार निकलकर लाइब्रेरी में लगातार 3 महीने तक बैठा दिया जाता था, फिर भी पढ़ने और कुछ करने की लालसा में वह हर दिन स्कूल जाती रही.

मुख्यमंत्री को लिखा मार्मिक पत्र, विभाग की मानवता शून्य
छात्रा ने अपनी पीड़ा को प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल को पत्र लिख कर अवगत कराया है. साथ ही जिले के कलेक्टर अंकित आनंद जिला शिक्षा अधिकारी सयुक्त संचालक शिक्षा विभाग समाज कल्याण विभाग दुर्ग को भी लिखित पीड़ा बताई है। लेकिन सात फरवरी को लिखा पत्र आज भी लचर सरकारी तंत्र व्यवस्था के इर्द गिर्द घूम रहा है। खानापूर्ति के लिए कलेक्टर कार्यालय से छात्रा का पत्र 11 फरवरी को शिक्षा विभाग भेजा गया है. लेकिन कार्यवाही कुछ भी नही हुई। क्या पूरे सिस्टम में मानवता ख़त्म हो गयी है.

स्कूल प्रबंधन की साफ़ हिदायत फीस नहीं तो पुराना रिजल्ट नहीं न ही अगली परीक्षा
बहुचर्चित विद्यालय श्री शंकराचार्य ने साफ़ साफ़ छात्रा के परिजनों को हिदयात दी है जब तक पूरी फीस जमा नही करोगे तब तक नाही छात्रा का पूर्व रिजल्ट दिया जाएगा और नाही वर्तमान परीक्षा दे पायेगी। जहा शिकायत करना हो वहा करते रहिये हमारी पहुच बहुत ऊपर तक है। विद्यालय प्रबंधक ने पीड़ित छात्रा का पिछले साल के रिजल्ट की कॉपी भी नही दी जिससे छात्रा को मिलने वाली स्कालरशिप 1500 रुपय से भी वंचित होना पड़ा है। छात्रा के परिजनों ने आखरी उम्मीद करते हुए कार्यालय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन दुर्ग में भी शिकायत की है जहा कार्यवाही होने की किरण दिखाई दे रही है लेकिन कब तक में छात्रा को न्याय मिलेगा ये कह पाना अभी संभव नहीं है।

और भी हैं पीड़ित…. ?
विश्वसनीय सूत्रों से जो जानकारी निकल कर सामने आई है उससे पता चला है कि श्री शंकराचार्य विद्यालय में कई छात्रों ने अपना नाम कटवा लिया है शुरुआती दौर में अधिकांश गरीब छात्रों की फीस माफ कर दी गयी थी और अचानक माफ की हुई फीस की मोटी रकम मांगने पर कई छात्रों के परिजनों ने विद्यालय से बच्चो का नाम कटवा दिया है। यहां तक कि विधालय में पढ़ाने वाले शिक्षकों के बच्ची से भी मोटी रकम वसूली जा रही है। शुरुआत में सालाना इनकम कम दिखाने के लिए ये तरीका विद्यालय ने अपनाया है जिसका खामियाजा मजबूर छात्र उठा रहे है। शिक्षा से वंचित करने का जो तरिका बहुचर्चित विद्यालय ने उठाया है वह बेहद ही शर्मनाक है और उससे भी ज्यादा संवेदनहीन बने बैठे प्रशासनिक तंत्र है। जो बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का स्लोगन लिए घूम रहे है। आने वाले 18 फरवरी से छात्रा की परीक्षा भी संचालित होगी लेकिन उसे बैठने नही दिया जायेगा।

नियम को आँख दिखते स्कूल प्रबंधन
आप को बता दे सामान्य छात्रों के लिए 14 साल तक निशुल्क शिक्षा का अधिकार मिला हुया है तो वही दिव्यांग छात्रों को 18 साल तक निशुल्क शिक्षा का अधिकार मिला हुया है लेकिन प्रदेश भर में इस नियम के तहत किसी भी निजी विद्यालय ने दिव्यांग छात्रों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है और जिम्मेदार शिक्षा जगत के प्रशासनिक अधिकारी मौन बने बैठे।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.