July 31, 2021

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर एक हाथी को जंगल में छोड़ने हवाई जहाज से ले गए 4000किमी दूर…दूसरी तरफ कोर्ट के आदेश के वावजूद छत्तीसगढ़ वन विभाग सोनू हाथी को जंगल में छोड़ने की जगह बनाने जा रहा कुनकी…

हेड ऑफ फॉरेस्ट के आदेशों की भी उड़ा रहे धज्जियाँ

रायपुर, 4 नवंबर 2020. एक तरफ हाथियों की संरक्षण, संवर्धन करने अंतर्राष्ट्रीय संगठन अभियान चलाकर उन्हें बचाने हर संभव कोशिश कर रहे हैं। वहीं राज्य के वन अमला हाथियों को लेकर कितने गंभीर है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की वे हाईकोर्ट के निर्देशों के विपरित हाथियों को अवैध तरीके से बंधक बनाकर अपने रेस्क्यू सेंटर में कुनकी बना रहे हैं। 

उल्लेखनीय है पाकिस्तान के इस्लामाबाद जू में रखे गए कावन नामक हाथी ने अंतरराष्ट्रीय अट्रैक्शन बटोरा है. कावन को 35 साल पहले 1 साल की उम्र में श्रीलंका ने पाकिस्तान को गिफ्ट किया था. 8 साल पहले कावन के साथ रह रही सहेली नामक मादा हथिनी की मौत जू के अधिकारियों की लापरवाही से होने के बाद 8 साल से कावन अकेला रह रहा था. उसे दुनिया के सबसे अकेले हाथी का खिताब मिला.

पाकिस्तान के जू में कावन के साथ क्रूरता की समस्त सीमाएं लांघ दी गई. छोटी चेन से बांध के रखा गया, पूरे समय पांव गीले में रखा रहता था, जिससे उसके नाखून खराब हो गए. इसी बीच अमेरिका की पॉप सिंगर चेर की जानकारी में अकेले रह रहे कावन हाथी की बात आई. जिसके बाद मामला इस्लामाबाद हाईकोर्ट पहुंचा. इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने वहां के जू की दुर्दशा देखकर जू ही बंद करा दिया और आदेशित किया कि वहां रह रहे सभी जानवरों को दूसरे उचित जगह पर भेजा जावे.

1 दिसंबर 2020 वह भाग्यशाली दिन था जब रूस के कार्गो विमान से कावन को 4000 किलोमीटर दूर पाकिस्तान से कंबोडिया पहुंचा दिया. 8 साल बाद पहली बार कावन पहली बार दूसरे हाथी से मिला. अब वाह सेंचुरी में अन्य हाथियों के साथ रह सकेगा. कावन को कंबोडिया भिजवाने का प्लेन का आधा खर्च पॉप सिंगर चेर ने किया.

वन विभाग के कारण छत्तीसगढ़ के दुर्भाग्यशाली सोनू हाथी का भाग्य नहीं चमका
छत्तीसगढ़ का वन विभाग हाथियों को अपने लिए समस्या मानता है. वर्ष 2016 में अचानकमार टाइगर रिजर्व में घूम रहे 13-14 वर्षीय युवा नर सोनू को बंधक बना लिया. वह भी तब जबकि सोनू के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी ने आदेशित किया था कि उसे पकड़ कर दूसरे उचित रहवासी में छोड़ा जाए. परंतु कुछ जिद्दी अधिकारियों ने उसे बंधक बना लिया और इतना प्रताड़ित किया कि उसके चारों पांव सड़ने की स्थिति में आ गए. तब मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा. हाईकोर्ट में संवेदनशीलता दिखाते हुए 24 घंटे में सोनू हाथी के लिए जनहित याचिका की सुनवाई की. उसके इलाज के लिए केरल से डॉक्टर बुलवाएं. तब एनिमल वेलफेयर बोर्ड आफ इंडिया ने अनुशंसा की कि सोनू को ठीक होते से ही वापस जंगल में छोड़ दिया जाए परंतु वन अधिकारी अधिकारी अपनी जिद पर अड़े रहे और उसे जंगल में नहीं छोड़ा. तब फिर हाईकोर्ट ने केरल के डॉक्टर Menon TS और डॉक्टर राकेश चितौरा को बुलवाया और सोनू की स्वास्थ्य जांच करवाई. डॉक्टर Menon TS ने अनुशंसा की कि सोनू को ऐसे हाथी कैंप में रखा जाए जहां वह वन हाथियों से मिल सके तथा धीरे-धीरे पुनः जंगल का आदी होकर जंगल में चला जावे. उन्होंने अनुशंसा की थी अचानकमार टाइगर रिजर्व में रह रहे अन्य तीन हाथी राजू, सिविल बहादुर और लाली को भी वन क्षेत्र से लगे हाथी कैंप में रखा जाए जहां से वह भी जंगल के आदी हो सके. हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2017 को आदेशित किया कि वह डॉक्टर राजीव टीएस की रिपोर्ट को शत-प्रतिशत मानते हैं और वन विभाग के विवेक पर छोड़ते हैं कि सोनू को वापस कब जंगल में भेजा जावे.

वन विभाग ने बड़े-बड़े दावे करके छत्तीसगढ़ के तमोर पिंगला रेस्क्यू सेंटर बनवाया और वहां पर सोनू और सिविल बहादुर को 2018 में शिफ्ट कर दिया. हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद लाली और राजू को अचानकमार टाइगर रिजर्व में ही पेट्रोलिंग के लिए रख लिया. काम लेने के उद्देश्य से जनवरी 2020 में राजू को टाइगर ट्रेसिंग के लिए बालोद भेजा गया था. सोनू हाथी अब तमोर पिंगला में बंधक हाथी के रूप में रह रहा है और वन विभाग ने उसे वापस जंगल भेजने के लिए विचार ही नहीं किया. अब उसे आजीवन बंधक रहना पड़ेगा.

सोनू को वापस जंगल छोड़ने के लिए वन विभाग का विवेक तो नहीं जागा परंतु सोनू को अब कुनकी हाथी बनाने लगे हैं

सोेनू हाथी की उम्र को देखते हुए सरगुजा एलिफेंट रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर ने दो माह पूर्व 6 अक्टूबर को पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि सोनू हाथी की उम्र को देखते हुए उसे कुनकी बनाने प्रशिक्षण देने का काम चल रहा है। सोनू को कुनकी बनाने महावतों की मदद ली जा रही है. गौरतलब है कि उनकी बनाने के लिए हाथी पर बहुत अत्याचार किया जाता है.

पीसीसीएफ जो अब हेड ऑफ फॉरेस्ट है के निर्देशों की धज्जियां उड़ाई

उल्लेखनीय है कि सोनू तथा सिविल बाहदुर को अचानकमार टाइगर रिजर्व से तमोर पिंगला में पांच मई 2018 को शिफ्ट किया गया। कुछ वन्यजीव प्रेमियों ने इस संबंध में तत्कालीन पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ जो अब हेड ऑफ फॉरेस्ट है उन्हें शिकायत की कि तमोर पिंगला में रेस्क्यू सेंटर इस प्रकार बनाया ही नहीं गया है जहां पर सोनू हाथी पुनः वन हाथियों से मिल सके और पुनः वन में स्थापित हो जावे. हेड आफ फॉरेस्ट ने संवेदनशीलता दिखाते हुए 28 मई 2019 को वन संरक्षक वन्य प्राणी एवं क्षेत्र संचालक एलीफेंट रिजर्व सरगुजा को पत्र लिखकर आदेशित किया कि डॉ राजीव टीएस और डॉक्टर राकेश चितौरा की टीम को बुला कर तमोर पिंगला में बने एलीफेंट रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर का निरीक्षण करवाएं और कार्यवाही से उनको अवगत कराएं परंतु सभी संबंधित वन अधिकारी जानते हैं कि उन्होंने डॉ राजीव टी एस की अनुशंसा के विरुद्ध रेस्क्यू सेंटर बना दिया है और सोनू को कुनकी बनाने की इच्छा है. डॉ राजीव टीएस को बुलाने से उनकी पोल खुल जाएगी इसलिए उन्होंने आज तक हेड ऑफिस के आदेश का पालन नहीं किया. इस संबंध में कुछ समय पूर्व रहे एपीसीसीएफ वन्य प्राणी ने स्वीकारा था कि अब बहुत देर हो चुकी है अब हेड ऑफ फॉरेस्ट के आदेश का पालन नहीं कराया जा सकता. जानकारों का कहना है कि हेड ऑफ फॉरेस्ट के आदेश का पालन नहीं कराने के पीछे वन विभाग के अधीनस्थों कि यही मंशा है अपने को श्रेष्ठ साबित करने के लिए कि सोनू को किसी भी तरह आजीवन कैद में रखना है.

वन विभाग चाहे तो सोनू के लिए आशा की किरण जिंदा रहेगी
जानकारों का कहना है कि हाथी कभी भी अपने प्राकृतिक प्रवृत्ति नहीं खोता. हमारे देश में ही हथिनी के बंधक अवस्था में हुए बच्चे को 10 साल की उम्र होने पर पुनः वन में हरदम के लिए सफलतापूर्वक छोड़ा गया. जिसका श्रेय वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया को जाता है.

छत्तीसगढ़ का वन विभाग अगर पर्यटन को बढ़ावा देने के काम को छोड़कर गंभीरता से और इमानदारी से वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम करें तो सोनू को अब भी डॉ राजीव टीएस की अनुशंसा के अनुसार कार्य कर वापस जंगल में छोड़ कर के उदाहरण प्रस्तुत किया जा सकता है तब शायद सोनू का भाग्य भी कावन के समान चमक जाए.

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