August 1, 2021

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मुख्य वन संरक्षक बड़गैयया को सूचना आयोग ने जारी किया कारण बताओ नोटिस…. कहा ..”क्यों नहीं आप के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा की जावे”…. डीएफओ को भी जारी हुआ 25000 अर्थदंड का नोटिस…

रायपुर, 18 दिसंबर 2020। हमेशा विवादों में घिरे रहने वाले आईएफएस अधिकारी एसएसडी बड़गैयया को सूचना का अधिकार कानून को ताक में रखने के कारण सूचना आयोग ने शो कॉज नोटिस जारी कर पूछा है कि छत्तीसगढ़ शासन के आदेश के अनुसार और सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत शासन से क्यों नहीं उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जावे?

क्या है मामला ?

रायपुर के एक आवेदक नितिन सिंघवी ने वनमंडल अधिकारी धमतरी से नगरी क्षेत्र में चल रहे निजी जू के विरुद्ध की गई कार्यवाही के दस्तावेज चाहे थे. वनमंडल अधिकारी ने न्यायालय में प्रकरण लंबित होने के नाम से जानकारी देने से मना करने के कारण मुख्य वन संरक्षक रायपुर बड़गैयया के समक्ष प्रथम अपील दायर की. अपील मे सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और छत्तीसगढ़ शासन के आदेशों का हवाला देकर वनमंडल अधिकारी धमतरी द्वारा दिए गए जवाब की प्रति मांगी. जिसे बड़गैयया ने देने से मना कर दिया और अपील निरस्त कर दी.

क्या कहा आयोग ने?

अपने आदेश में राज्य सूचना आयुक्त एके अग्रवाल ने लिखा है कि प्रथम अपीलीय अधिकारी एसएसडी बढ़बड़गैयया मुख्य वन संरक्षक रायपुर ने स्पीकिंग ऑर्डर पारित नहीं किया और सुनवाई के समय जन सूचना अधिकारी के जवाब अपीलआर्थी को नहीं दी जिसके कारण अपीलआर्थी समुचित ढंग से अपना पक्ष अपने समर्थन मैं नहीं रख सके और प्रथम अपील आवेदन का गुण दोष के आधार पर निराकरण नहीं किया. उन्होंने अपने आदेश में अधिनियम की धारा 8(1)(j) का उल्लेख करते हुए प्रथम अपील खारिज कर दी. जब की धारा 8(1)(j) में ऐसी सूचना नहीं दी जाने के प्रावधान है जो कि व्यक्तिगत सूचना हो जिसका प्रकटन किसी लोग क्रियाकलाप या हित से संबंध नहीं रखता हो या जिससे व्यक्ति की एकांता पर अनावश्यक अतिक्रमण होता है.

आयोग ने आदेश में लिखा की इस प्रकरण में अपीलआर्थी द्वारा व्यक्तिगत जानकारी चाही ही नहीं गई थी इसलिए बड़गैयया के विरुद्ध क्यों नही छत्तीसगढ़ शासन के आदेश अनुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए लेख किया जावे. अगली पेशी दिनांक 8 जनवरी 2021 को बड़गैयया को आयोग के समक्ष उपस्थित होना सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए गए हैं.

विधायक ने भी की थी कांकेर से हटाने की अनुशंसा

केशकाल विधायक और बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संतराम नेताम ने कार्य में रुचि नहीं रखने और पूर्व प्रकरणों में अनिवार्य सेवानिवृत्त का प्रकरण लंबित होने के कारण बड़गैयया को कांकेर से हटाने की अनुशंसा की थी परंतु वे उनका ट्रांसफर नहीं करवा पाए.

बड़गैय्या माने जाते हैं विभाग के सबसे दमदार अधिकारी

जानकारों का कहना है कि बड़गैयया के लिए राज्य सूचना आयोग की नोटिस कोई बड़ी बात नहीं है। क्योकि वो पहले भी बड़े मामलों आरामिल जैसे विभिन्न प्रकरणों में आरोपी रहने के बावजूद बरी हो चुके हैं। एसीबी के छापों जैसी घटनाओं से भी वह आहात नहीं हुए और सफलता पूर्वक आरोपों से बाहर आ गए तो आयोग की नोटिस उन्हें विचलित नहीं कर सकती है। यह सभी को मालूम है कि बड़गैय्या एक ससक्त, समझदार, विभाग में पकड़ रखने वाले और विभाग के दमदार अधिकारियों में गिने जाते है। विभाग के बड़े, उच्च अधिकारी भी उनके अनुभव और सलाह से न केवल काम लेते हैं बल्कि उनकी बातों को काट पाना भी उच्च अधिकारियों के लिए आसान नहीं होता है।

वनमंडल अधिकारी (डीएफओ) को 25000 के अर्थदंड का लगाने नोटिस जारी

आयोग ने इसी प्रकरण में वनमंडल अधिकारी धमतरी अमिताभ बाजपेई को रुपए 25000 के अर्थदंड अधिरोपित करने और उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए अनुशंसा करने का कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

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