December 2, 2022

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अवैध खनन : रेत को लेकर अब दो गांवों में संग्राम शुरू एक दूसरे सरपंच पर एफआईआर करने पर आतुर चोरी छिपे रेत निकालने का मामला

बालोद। डिलेशर देवांगन। बालोद जिला खनिज संपदा से भरपूर है और इन्हीं खनिज संपदाओं का दोहन दोहन लगातार हो रहा है लेकिन जिम्मेदार विभाग की नाकामी के चलते के चलते आज आज संपदा का दोहन करने वालों के हौसले बुलंद हैं हैं कभी-कभी कारवाही के के नाम पर महज एक औपचारिकता पूरी करने के साथ ही विभागीय जिम्मेदार अफसर महज खानापूर्ति करते हैं। शुक्रवार को फिर जिले की खनिज संपदा को लेकर दो गांव के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई और अब तो दोनों गांव के लोग एक दूसरे सरपंच पर एफआईआर तक कराने कराने की बात कर रहे हैं।

दरअसल मामला शुक्रवार उगते सूरज के साथ शुरू हुआ। मुख्यालय से लगे ग्राम हीरापुर और उमरादाह के ग्रामीणों के बीच रेत खनन को लेकर विवाद शुरू हो गया गया हो गया गया। उमरादाह के ग्रामीण कहते हैं हमारे गांव से अगर कोई रेत निकलता है तो 200 रुपए वसूला जाएगा। इस बात की जानकारी गांव के सरपंच को नहीं है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार को सुबह-सुबह उमरादाह से अवैध रूप से रेत निकाला जा रहा रहा था जहां कुछ ग्रामीण पहुंच कर 2-2 सौ रुपए की वसूली कर रहे थे। गांव के किसी नागरिक ने मीडिया को फोन कर यह बताया कि बताया कि गांव के सरपंच द्वारा अवैध रूप से रेत खुदाई करवाकर अवैध माफियाओं से 200 की वसूली करवा रहा है।

सुबह से लग गई थी आधा दर्जन गाडियां, ग्रामीणों को देख भागे माफिया

जब मीडिया को अवैध रेत खनन होने की जानकारी मिली तो तत्काल मौके पर पहुंचकर मुआयना किया तो पता चला कि उमरादाह के रास्ते से गांव के ही एक व्यक्ति के निजी जमीन से रेत की अवैध रूप से निकासी की जा रही थी। जहां कुछ ग्रामीण पहुंचकर दो-दो सौ रुपये की वसूली करने लगे। हीरापुर के सरपंच पति सतानन्द साहू ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली कि उनके गांव के खदान से उमरादाह के लोगों द्वारा अवैध रूप से हर रेत निकालने की अनुमति दी गई है और रेत निकाली जा रही है जिसके लिए दो-दो सौ रुपये भी लिए जा रहे है। जिसकी जानकारी मिलते ही श्री साहू सहित हीरापुर के पंच व अन्य ग्रामीण उमरादाह की ओर दौड़ पड़े। लोगों को आते देख रेत खदान में लगी आधा दर्जन गाड़ियां रास्ते बना कर भाग खड़े हुए।

कौन किस पर करेगा एफआईआर

वही जब हीरापुर के लोग रेत खदान पहुंचे तो मामला लगातार तूल पकड़ने लगा और विवाद की स्थिति वही पर निर्मित हो गई। हीरापुर के लोगों का कहना है कि उनके गांव के रेत खदान से उनकी बगैर जानकारी के उमरादाह के जिम्मेदारों की अनुमति से उनके गांव से होकर रेत निकाला जा रहा है जो की अवैध है। सतानन्द का कहना है कि हमारे गांव की संपदा हमारी जानकारी के बगैर निकलना गलत हैं आज उमरादाह के लोगों को समझाइश दे दी गई है अगर दोबारा इस तरह का कृत्य उनके द्वारा किया जाता है तो गांव के सरपंच के ऊपर एफआईआर कराने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

मुझे जानकारी नहीं, कब किसने लिया निर्णय

उमरादाह के सरपंच सखाराम देवांगन ने कहा कि हीरापुर के ग्रामीणों का कहना ठीक है। हमारे गांव के एक किसान का खेत खार उनके गांव में है। हमारे गांव का खदान 2 माह से बंद हो चुका है। हीरापुर वाले रेत निकालने के लिए परमिशन दिया है या नहीं इस बात की जानकारी मुझे नहीं है। बीच में इसी तरह से फिर से रेत निकाला जा रहा था गांव समिति बीना पंचायत को जानकारी दिए कब और क्या निर्णय लिया इसकी जानकारी मुझे नहीं है। हीरापुर के कोई नागरिक उनके पास फोन किये की आपके गांव की ओर से हमारे गांव के खदान से अवैध रूप से रेत निकाला जा रहा है। जिसकी जानकारी मिलते ही पंचायत में पंचायत प्रतिनिधियों की मीटिंग बुलाई गई थी। जहाँ सरपंच ने कहा कि मेरे जानकारी के बगैर रेत कैसे निकाला जा रहा है। बाद में मेरे ऊपर पूरा आरोप आएगी। कल से हमारे गांव से रेत नही निकलना चाहिए। हीरापुर का खदान है वहां के लोग कुछ भी करे। वहीं उमरादाह सरपंच ने बताया कि अभी गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना बनाने का सिलसिला चल रहा है, गांव समिति में पंचायत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में निर्णय लिया गया है कि सोमवार या मंगलवार को पीएम आवास बनाने के लिए गांव के लोग गांव वालों को जानकारी देकर, कॉपी में नाम लिखवा कर और 50 रुपये गांव समिति में जमा कर रेत निकाल सकता है। बाकी दूसरे गांव के लिए रेत निकलने की किसी भी प्रकार से परमिशन मेरे द्वारा नही दी गई है।

खनिज विभाग मौन

जिले में हो रहा लगातार खनिज संपदा का दोहन
विभागीय जिम्मेदार मौन, इसीलिए हौसले बुलंद

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