July 5, 2022

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आसान नही भाजपा की राह, भाजपा के असंतुष्ट और बागियों की वजह से कांग्रेस कर रही लीड। देखिये कहा कौन है भारी..

रायपुर। ब्यास मुनि द्विवेदी। राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है, कुछ दिन पहले तक भाजपा में अनुसाशन का पाठ चल रहा था भाजपा आंकलन में लीड कर रही थी, लेकिन टिकट वितरण होते ही समीकरण बदलने लगे। भाजपा के असंतुष्ट खुलकर विरोध में उतर आये जिससे कांग्रेस की राह आसान होती नजर आ रही है। प्रदेश के मुद्दे बौने होने लगे जातिगत आंकड़े और बागियों के वोट काटने का हिसाब आगे आ गया। अब यह तय हो रहा है कि कौन किसका कितना वोट कटेगा। किसको कौन नुकसान या फायदा पहुचायेगा।

दिशाहीन जोगी कांग्रेस की रणनीति
प्रदेश में सबसे ज्यादा नजर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की रणनीति पर टिकी थी, लेकिन अजीत जोगी की रणनीति पूरे घटना के दौरान भटकती रही। पहले मुख्यमंत्री के खिलाफ लड़ने वाले थे फिर चुनाव नही लड़ने वाले थे आखिरी में सुरक्षित सीट मरवाही से लड़ने का ऐलान हुआ। जोगी जी की बहू ऋचा जोगी का बहुजन समाज पार्टी से लड़ने का फैसला कार्यकर्ताओं को समझ से परे रहा, कार्यकर्ता इस असमंजस में आ गए कि क्या जोगी जी को अपनी पार्टी पर भरोसा नही रहा या पार्टी से ज्यादा जरूरी अपने परिवार में विधायक बनाना था। बहुजन के लोग भी परेसान थे कि गठबंधन के बाद बहुजन को मिली सीट पर भी जोगी के उम्मीदवार लड़ रहे हैं। फिर भी जोगी जी कांग्रेस की कम से कम तीन तीन सीट पर पक्का नुकसान पहुचा रहे हैं। सभी सीटे बिलासपुर संभाग से आती हैं।

प्रदेश के मुद्दे
वैसे तो प्रदेश के मुद्दे गायब हैं विधानसभा स्तर पर अलग अलग मुद्दे जरूर है। बड़े स्तर के मुद्दे में किसानों को धान का समर्थन मूल्य नही मिला जो आज भी मुद्दा बना हुआ है। दूसरी तरफ अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने का मुद्दा भी बना हुआ है। नक्सलवाद बस्तर के लिए आज भी समश्या बना हुआ है।

सीटों का आंकलन

पूरे प्रदेश की सीटों का एक साथ आंकलन करने से समझना मुश्किल है अगर एक-एक सीट का अंकल करें तो समझना आसान होगा कौन कहा भारी है। यहाँ पर संभाग वार सीटों का गणित समझने की कोसिश करते हैँ।

सरगुजा संभाग

सरगुजा संभाग में कोरिया, सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर जसपुर जिले की विधानसभा क्र. 1 से 14 तक आती है। विधानसभा चुनाव 2013 की बात करें तो 7-7 सीट भाजपा और कांग्रेस को मिली थी। जिसमे कोरिया और जसपुर की पूरी 6 सीट भाजपा के खाते में गयी थी एक सीट सूरजपुर जिले की एक मात्र प्रतापपुर सीट भाजपा को मिली थी। लेकिन इस बार कोरिया और जसपुर में भी कांग्रेस बढ़त बना रही है। बैकुंठपुर सीट से मंत्री भैयालाल राजवाड़े के खिलाफ स्व. रामचंद्रदेव की भतीजी श्रीमती अम्बिका सिंह देव और मनेन्द्रगढ़ से श्यामविहारी जैसवाल के खिलाफ डॉ विनय जैसवाल को उतार कर चुनाव रोचक बना दिया है। जसपुर में भी पत्थलगांव सीट में कांग्रेस भारी दिख रही है।
इधर अम्बिकापुर सीट से टी एस सिंह देव की भारी जीत कांग्रेस पक्का मान रही है भटगांव और प्रेमनगर में भाजपा अंतर्कलह नही रोक पा रही जिसका फायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा है।
अगर देखा जाए तो 14 में से 10 सीटों पर कांग्रेस भारी दिखाई दे रही है। अगर परिणाम ऐसे आते हैं तो इसका श्रेय टी एस सिंहदेव को ही मिलेगा।

बिलासपुर संभाग

बिलासपुर संभाग में रायगढ़ से लेकर मुंगेली तक की 24 सीटे आती हैं। सबसे ज्यादा उठापटक इसी इलाके में होनी है अजीत जोगी और बसपा की वजह से कई सीटों में त्रिकोणीय संघर्ष रहेगा। इस संभाग की सबसे चर्चित सीट रायगढ़ जिले की खरसिया है जिसमे पूर्व कलेक्टर भाजपा से ओपी चौधरी काँग्रेस के गढ़ में उमेश पटेल को चुनौती दे रहे हैं। दूसरी तरफ कोरबा जिले की कोरबा सीट जिसमे दो बड़े धनाढ्य ठेकेदार आमने सामने है एक तरफ कांग्रेस से जयसिंह अग्रवाल तो भाजपा से विकास महतो है। पाली तानखार विधानसभा से तीन बार विधायक रहे रामदयाल उइके को भाजपा ने पार्टी जॉइन करा कर कॉग्रेस को पटकनी दे दिया है। मरवाही विधानसभा से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी स्वयं मैदान में है। कोटा सीट में भी जोगी का प्रभाव रहेगा। बिलासपुर शहर से मंत्री अमर अग्रवाल और बिल्हा से भाजपा प्रदेश अध्य्क्ष मैदान में है। कुल मिलाकर कांग्रेस की पक्की काम से कम 5 सीट हाथ से इस संभाग से खिसकती नजर आ रही है लेकिन इसका पूरा फायदा भाजपा को नही बल्कि बसपा जोगी अन्य को जा रहा है। इस संभाग में भाजपा लीड करते नजर आ रही है। अगर सीट के लिहाज से देखें तो 2013 में भाजपा को 24 में से 12 सीट, कांग्रेस को 11 और बसपा को एक सीट मिली थी।
इस बार यहां कांग्रेस और भाजपा दोनो की सीट कम होते नजर आ रही है। अन्य के खाते में 5 सीट जा सकती है।

रायपुर संभाग

रायपुर संभाग में तीन दिग्गज मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष मैदान में है। रायपुर दक्षिण से बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम से राजेश मूणत कुरूद से अजय चंद्राकर और कसडोल से गौरीशंकर अग्रवाल, इसके साथ ही चर्चित सीटों में महासमुंद सीट से निर्दलीय उम्मीदवार एव विधायक डॉ विमल चोपड़ा है जहाँ भाजपा और कांग्रेस दोनो ने जातीय समीकरण देखते हुए चंद्राकर उम्मीदवार उतारे हैं जिससे त्रिकोणीय संघर्ष बना हुआ हैं। इसके अलावा महासमुंद जिले की बसना और सरायपाली सीट से भाजपा को उनके पार्टी के बागी परेसान कर रहे हैं। यहां भाजपा के लिए राह आसान नही है।
सीट की गणित के आँकलन कर देखा जाए तो 2013 में संभाग की 20 सीटों में से 15 भाजपा के खाते में एक निर्दलीय और कांग्रेस के खाते में मात्र 4 सीट ही आयी थी लेकिन इस बार समीकरण बदलते दिख रहे हैं। कांग्रेस रायपुर संभाग में बढ़त बना रही है। कमसे कम कांग्रेस की 7 सीट यहाँ आ सकती हैं।

दुर्ग संभाग
दुर्ग संभाग में कुल 20 सीटे हैं सबसे चर्चित सीट मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की राजनांदगांव है जिनके खिलाफ अटल जी की भटिजी करुणा शुक्ला कांग्रेस की उम्मीदवार हैं। भिलाई नगर से मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय एवं नवागढ़ से मंत्री दयालदास बघेल उम्मीदवार है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल पाटन विधानसभा से पूर्व मंत्री रविन्द्र चौबे साजा एवं मोहम्मद अकबर कवर्धा विधानसभा से मैदान में है। इस बार भाजपा के लिए सबसे संकट वाला संभाग यही है। यहां पर पार्टी में खुलकर बगावत हो रही है जो भाजपा को नुकसान जरूर पहुचायेगी। बगावत में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडेय के भाई अहिवारा के उम्मीदवार और विधायक सबसे आगे हैं।
सीट की गणित देखे तो 2013 में 20 में से 11 सीटें भाजपा के खाते में गई थी, 9 सीट कांग्रेस को मिली थी। इस बार कांग्रेस इस संभाग में अप्रत्याशित बढ़त बना सकती है।

बस्तर संभाग
बस्तर संभाग से सरकार बनने बिगड़ने का पिटारा खुलेगा बस्तर में कुल 12 सीटे है जिसमे से भाजपा को 4 एवं कांग्रेस को 8 सीट 2013 में मिली थी। इस यहां से भाजपा के 2 वर्तमान एवं 2 पूर्व मंत्री मैदान में है। भाजपा ने पूरे पाच साल बस्तर में चुनावी काम किया है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर कई केन्दीय मंत्रियों का लगातार दौरा हुआ है। इसके बाद भी बहुत सकारात्म रुझान भाजपा के लिए दिख नही रहे हैं। सबसे ज्यादा नक्सल से प्रभावित यही क्षेत्र है नक्सलवाद यहां बड़ा मुद्दा है। इस बार भी क्षेत्र के जानकारों का मानना है सीट के लिहाज से कांग्रेस आगे रहेगी यही स्थिति रह सकती है।

अभी और भी उठापटक होगी राजनीति में तय कुछ भी नही होता है। देखते रहिये ऊंट किस करवट बैठता है।

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