September 29, 2022

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इंटेलिजेंस विभाग द्वारा गोपनीय दस्तावेज जलाए जाने के मामले ने पकड़ा तूल

रायपुर। इंटेलिजेंस विभाग द्वारा गोपनीय दस्तावेज जलाए जाने का मामला तूल पकड़ने लगा है। रायपुर के चार वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ताओं ने राजभवन में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन देकर उक्त मामले के संबंधित अधिकारियों के गिरफ्तारी की मांग की।

आशंका जताई गई कि प्रदेश के महत्वपूर्ण घोटालों नान, इंदिरा प्रदर्शनीय वैंक आदि की पत्रावली को भी जला दिया गया है।

नवीन सर्किट हाउस स्थित आईसीएच में पत्र प्रतिनिधियों के वार्ता करते हुए आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे, कुणाल शुक्ला, अभिषेक प्रताप सिंह ने राज्य की पुरानी सरकार के घोटालों व उनकी कार्यशैली पर जहां सवालिया निशान लगाया वहीं नई सरकार से मांग भी किया कि रमन सरकार के घोटालों की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराएं।

बताया कि गत 15 वर्षों में रमन सरकार ने एक प्राइवेट लिमिटेड फर्म की तरह कार्य किया है जिसमें हित जनता का नहीं सिर्फ और सिर्फ सीएम रमन सिंह व सुपर सीएम सहित कुछ मुठ्ठी भर आइएएस व आइपीएस अधिकारियों को मिला है।

आरटीआई कार्यकर्ताओं ने बाकायदा एक एक अधिकारी का नाम लेकर उनके कृत्यों को बताया। कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने बड़ी उम्मीद से कांग्रेस को सत्ता की चाबी सौंपी है। कहा कि राज्य में प्रतिनियुक्ति पर आए भ्रष्ट आइएएस अधिकारियों को वापस किया जाना चाहिए और उनकी पत्नियों द्वारा चलाई जा रही कंपनी को भी बंद किया जाना चाहिए।

15 वर्षों से मंत्रियों के ओएसडी व निज सचिव का कार्य देख रहे अधिकारियों कर्मचारियों को वापस उनके मूल विभाग में वापस किया जाना चाहिए। इंटेलिजेंस द्वारा फाइलों को नष्ट करने के लिए अपना गया तरीका न्याय संगत नहीं है और इसके लिए संबंधितों पर कार्रवाई होनी चाहिए। कहा कि प्रदेश में सीएम सिंटीकेट व उनके नवरत्नों ने प्रदेश को तबाह कर रखा था।

लिया अमन से ओपी तक का नाम

आरटीआइ कार्यकर्ताओं ने रमन सिंह सरकार में भ्रष्टाचार करने वाले कई अधिकारियों का नाम खुलकर लिया। इनमें अमन सिंह, शिवराज सिंह, सुनील कुमार, मुकेश गुप्ता, ओपी चौधरी व रजत बंसल उनके निशाने पर रहे। ओपी चौधरी व रजत बंसल पर स्मार्ट सिटी परियोजना में दो सौ करोड़ का घपला करने का आरोप भी लगाया।

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