December 2, 2022

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ब्रेकिंग न्यूज़: एक पन्ने के सफ़ेद कागज में बिना नियम क़ानून के राजधानी में किया हॉस्पिटल को सील, बंद करने का कारण पूछने पर छुपा रहे मुह, वसूली का खेल या कोई हाई प्रोफाइल मामला ? सोशल मीडिया में जमकर हो रही आलोचना

रायपुर. छत्तीसगढ़ में अस्पतालों के हालात किसी से छिपे नहीं है, अस्पताल धंधा कर रहे है इनमे नियंत्रण करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने नर्सिंग होम एक्ट लाया था, जिसमे कई नियम कानून बनाये गए. जिसे राज्य के अस्पताल धता बताते रहे है. मेडिकल बेस्ट डिस्पोजल के मामले में फिसड्डी नजर आया है.

अस्पतालों में नकेल कसने वाले ही किस तरह की कायवाही करते है इसका उदाहरण आज रायपुर के मोवा में एक “बिहान हास्पिटल” में मिला है. गजब का खेल है बिना सील सिग्नेचर के सादे कागज में बंद करने का चस्पा कर हास्पिटल बंद करा दिए.

इस कागज की, जिसमे किसी का सील सिग्नेचर नहीं है कि सत्यता जाचने मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी रायपुर डॉ के एस सान्डिल्य को फ़ोन किया गया तो उन्होंने कार्यवाही करने की बात मंजूर की. लेकिन जब कार्यवाही पर सवाल पूछना सुरु किया तो कार्यालय से बहार होने का बहाना बनाने लगे.

चस्पा किये गए पत्र में एक पत्र क्र/सीएमएचओ/सनह/2018/14677 दिनांक 01/08/2018 का हवाला देते हुए सील कर दिया है. जो पत्र हास्पिटल के संचालक को मिला नहीं. इस पत्र की रिसीवड प्रति फ़ोन कर और अपना रिपोर्टर भेजकर मुख्यचिकित्सा अधिकारी कार्यालय से मागी गयी और जिला चिकित्सा अधिकारी को से भी मागा गया किन्तु उपलब्ध नहीं करा पाए.

बता दे की किसी भी हॉस्पिटल को सील करने/बंद करने या उसका लाइसेंस रद्द करने की विधि छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम एक्ट की धारा 3(3) में दी हुई है, जिसमे साफ़ लिखा है की अस्पताल संस्थान के संचालक को कम से कम 30 दिन का सुनवाई हेतु समय दिया जाना है. लेकिन यहाँ पर ऐसा कुछ हुआ नहीं अगर यह मान भी लिया जाय कि दिनांक 01/08/2018 को पत्र जारी किया गया तब भी बिना सुनवाई का मौका दिए अस्पताल कैसे सील हो गया. इस सवाल पर सभी मुह छुपा रहे है.

इस कार्यवाही ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं –
१. बिना किसी क़ानून का पालन किये एक सादे कागज़ में बिना सीएमएचओ के सिग्नेचर के हॉस्पिटल बंद कैसे करा दिया गया, यह कही वसूली के के खेल का भाग तो नहीं है?

२. राजधानी में कई अस्पताल बिना पार्यावरण की मंजूरी के चल रहे लेकिन आज तक कार्यवाही शून्य क्यों है आखिर किस सांठ-गाँठ के चलते कार्यवाही नहीं हो रही? क्या कोई राजनीतिक दवाव है?

३. इस तरह की कार्यवाही किस अधिकारी के कहने पर ताबड़तोड़ की गयी? यह सवाल इसलिए उठ रहा क्योकि जाँच में गए अधिकारी संचालक से निजी सवाल पूछ रहे थे नाकि अस्पताल की व्यवस्था पर.

इस मामले में कौन सा हाईप्रोफाइल राज छुपा है जिसके कारण चिकित्सा अधिकारीयों ने ये कार्यवाही की है, यह तो जांच के बाद समय बताएगा किन्तु इस मामले की सोशल मीडिया में जमकर आलोचना हो रही, अस्पतालों में हड़कंप मच गया है।

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