July 5, 2022

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ओपी चौधरी के लिए मुसीबत खड़ी, राजनीतिक में आते ही आरोपों की लगी झड़ी। जमीन हेरा-फेरी का मामला पहुचा लोकायुक्त,

रायपुर। कहते है राजनीति में गड़े मुर्दे भी काम आते है। इसका जीता जागता उदाहरण बन रहे हैं ओपी चौधरी। कलेक्टर से नेता बने ओ पी चैधरी के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने हल्ला बोल दिया है। कल प्रेस कांफ्रेंस कर जमीन घोटाले का आरोप लगाने वाली पार्टी आज उसी मामले को लेकर लोकायुक्त एफआईआर दर्ज कराने पहुच गयी। आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रमुख डॉ संकेत ठाकुर अपने साथियों सहित लोकायुक्त कार्यालय पहुँचे और दाँतेवाडा ज़मीन घोटाले में तत्कालीन कलेक्टर ओ पी चौधरी एवं अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई लोकायुक्त को सौंपे शिकायती पत्र के अनुसार छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के संरक्षण में सरकारी जमीन और निजी जमीन की अदला-बदली के माध्यम से करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार कलेक्टर के द्वारा किया गया और उसे दबा दिया गया । 

बता दे कि कल ही आप ने आरोप लगाया था कि बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कोर्ट की अवमानना करते हुए  इसकी जांच तक नहीं की गई और ना ही कलेक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई । दंतेवाड़ा के तत्कालीन कलेक्टर ओपी चौधरी के संरक्षण में भूमाफिया को लाभ पहुंचाते  हुए यह सारा का सारा खेल वर्ष 2011 से 2013 के बीच किया गया। सरकारी खजाने को भारी क्षति पहुंचाई गई। मामला जब कोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट ने सितंबर 2016 में राज्य सरकार को आदेश दिया कि इस पूरे प्रकरण की जांच की जाए । इस मामले में संलिप्त तत्कालीन कलेक्टर, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं अन्य अधिकारियों को मुख्य न्यायाधीश बिलासपुर हाई कोर्ट ने दोषी  पाया तथा 1 लाख रुपये का जुर्माना ठोंका।

लोक आयोग में शिकायत

शिकायत में कहा गया है कि जिला पंचायत दन्तेवाड़ा के बगल में बैजनाथ की निजी कृषि 3.67 एकड़ जमीन थी, जमीन  मालिक बैजनाथ से इस जमीन को चार लोगों ने खरीदा,यह लोग थे मोहम्मद साहिल हमीद कैलाश गुप्त मिश्र मुकेश शर्मा और प्रशांत अग्रवाल जिसके बाद इस जमीन को विकास भवन के नाम पर सरकार ने लेकर  दन्तेवाड़ा में बस स्टैंड के पास करोड़ों की व्यावसायिक के साथ कृषि जमीन की अदला बदली कर ली। आरोप है कि ये पूरा काम 2011 से 2013  में ओपी चौधरी दन्तेवाड़ा के कलेक्टर के रहने के दौरान हुआ वर्ष 2011 में ओपी चौधरी दंतेवाड़ा के कलेक्टर बन कर आए इन चारों लोगों ने कलेक्टर चौधरी से आग्रह किया कि उनकी निजी भूमि जमीन को सरकार जिला पंचायत परिसर में विकास भवन बनाने के नाम पर ले ले मार्च 2013 में राजस्व निरीक्षक तहसीलदार पटवारी और एसडीएम ने मिलकर सिर्फ 15 दिन के भीतर ही इन चारों की निजी जमीन के बदले में सरकारी भूमि देने की प्रक्रिया पूरी कर डाली मात्र 1 दिन के भीतर ही जमीनी जमीन बेचने की परमिशन और नामांतरण संबंधी प्रक्रिया पूरी कर ली गई जिस जमीन को बैजनाथ से इन लोगों ने मात्र 10 लाख रुपए में खरीदा था उसे यह लोग 25 लाख रुपए में बेचने में सफल हो गए और उसके बदले में दंतेवाड़ा के बस स्टैंड के पास व्यावसायिक भूमि के साथ 2 अन्य स्थानों पर जमीन पर मालिकाना हक पाने में सफल रहे । निजी भूमि को मंहगे दर पर और सरकारी महंगी जमीन को सस्ती बताकर कूटरचना की गई । जिसके फलस्वरुप 5.67 एकड़ सरकारी कीमती भूमि हथिया ली गई । बाद में इस प्रकरण को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई जिसमें उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस दीपक गुप्ता एवं जस्टिस पी .सैम कोशी द्वारा 15/09/2016 को आदेश पारित किया गया जिसे सरकार ने 2 सालो तक क्यों दबा कर रखा यह बड़ा सवाल है जब हाई कोर्ट ने इन्क्वारी का आर्डर किया है । तो इन्क्वायरी क्यों नही की और अगर कोई इन्क्वारी की है तो इन्क्वायरी करने के पहले उनको ससपेंड क्यों नही किया और कोई इन्क्वायरी की है तो उसे आज तक जनता के सामने क्यों नही लेकर आये । इस तरह के तमाम अनसुलझे सवाल हैं जिनका जवाब आज हर कोई जानना चाहता है l डॉ संकेत ठाकुर ने यह भी कहा कि 24/04/13 के आदेश को हाई कोर्ट ने गलत साबित कर निरस्त कर दिया है और दुकानदारों को सिविल सूट फ़ाइल करने की सलाह दी है लेकिन यह प्रकरण भ्रष्टाचार का है इसलिए शासन ने भ्रष्ट्राचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण क्यों नही दर्ज किया ।

संकेत ठाकुर ने कहा कोर्ट ने साफतौर पर इसे लैंड स्कैम कहा है। इससे सरकारी पैसों और संपत्ति का नुकसान हुआ है। इसमें कलेक्टर और राजस्व अधिकारियों की सांठगांठ साफ दिखाई दे रही है खास बात यह है कि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कलेक्टर को गैर कृषि भूमि का एक्स्चेन्ज का अधिकार ही नहीं है। मतलब पूरा गोलमाल है। कोर्ट ने तमाम एक्सचेंज को रद्द करने का आदेश दिया आम आदमी पार्टी का यह सीधा आरोप है कि सरकार दागी अफसर को बचा रही है। अपने राजनीतिक फायदे के लिए उसे अपने दल में शामिल करवाया। एक तरह से सरकार ने ब्लैकमेलिंग की है। 
सरकार को इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जमीन पर विकास भवन बनना था वह आज भी वीरान पड़ा है । जबकि जिस सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया उस पर करोड़ों रुपये के शॉपिंग कांप्लेक्स बन गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी कई सामाजिक कार्यकर्ता ओपी चौधरी के कार्यकाल में हुई गड़बड़ियों को सामने आ सकते है।

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