October 5, 2022

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क्या है इंटनेट की काली दुनिया डीप और डार्क वेब का सच, ये पहुचा सकता है जेल की सलाखों तक,

दिल्ली (सुयश ग्राम) दुनिया मे बहुत कुछ ऐसा होता है जो  दिखता है उससे कही ज्यादा छुपा होता है। हम और आप सभी प्रतिदिन इंटरनेट का उपयोग करते है, परन्तु क्या आप इंटरनेट के उस काली दुनिया के बारे में जानते हैं जो संदिग्ध गतिविधियों के लिए दुनियाभर में कुख्यात है। इंटरनेट की इस दुनिया में सारे वो गैर-कानूनी काम होते हैं जो किसी भी देश को शर्मिंदा कर सकते हैं। यहां चाइल्ड पोर्न से लेकर हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त तक होती है। इंटरनेट के इस छिपे संसार को डीप और डार्क नेट के नाम से जाना जाता है। आप जिस इंटरनेट की दुनिया में भ्रमण करते हैं वो सिर्फ 4 फीसदी है बाकि 96 फीसदी इंटरनेट की दुनिया काली है। इस इंटरनेट की दुनिया में आपको सुपारी किलर से लेकर, बैन किताबें और फिल्में सब कुछ मिल जाएंगी।

लेकिन आपको ध्यान रखना होगा कि इंटरनेट के इस स्याह पाताल में भ्रमण करने के दौरान आप पकड़े गए तो आपको सजा हो सकती है। दरअसल, हम सर्च इंजन गूगल के जरिए जो एक्सेस करते हैं उससे भी नीचे इंटरनेट की परतें दबी हुई हैं। इसे एक्सेस करने के लिए यूजर्स को एक खास तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना पड़ता है जो कि यूजर की पहचान को गोपनीय रखता है और उसकी लोकेशन को ट्रेस नहीं होने देता। क्योंकि अगर एक बार लोकेशन ट्रेस हो गई तो समझिए आप इनवेस्टिगेशन एजेंसियों के निशाने पर आ गए।

कौन है इस काली दुनिया के इंटरनेट का निर्माता

इंटरनेट की इस हिडन और क्रिमिनल दुनिया को अमेरिका ने इजात किया है। इसे इजात करने का मकसद जासूसी करना था। आज से करीब 28 साल पहले 90 के दशक में अमेरिकी सेना ने डार्क वेब को बनाया था। इसकी परतें गहरे समुद्र में समाई हुई हैं। अमेरिका के जासूस इस दुनिया के जरिए दूसरे देशों पर नजर रखते थे। यानी उन देशों की जासूसी करते थे। लेकिन अमेरिका का यह हथियार उसे ही भारी पड़ा और इंटरनेट की यह दुनिया क्रिमिनल एक्टिविटी के लिए मशहूर हो गई। इतना ही नहीं अमेरिका ने इंटरनेट की इस दुनिया को न सिर्फ बनाया बल्कि यहां तक एक्सेस करने के लिए सॉफ्टवेयर का भी इजात किया।

हैकर्स की दुनिया का है ये स्वर्ग

आपने अक्सर सुना होगा कि कई हजार क्रेडिट कार्ड की इंफोर्मेशन चोरी हो गई है और वो डीप व डार्क वेब पर बिक रही है। दरअसल, हैकर्स यहां वो सारी चीज़ें बेचते हैं जो खुलेआम नहीं बेची जा सकती हैं। यहां डेबिट कार्ड के पासवर्ड से लेकर कई ऐसी चीज़ों की बोली लगती है जो आपको असमान्य लगेगा। डीप और डार्क वेब पर जाने वाले लोगों के अनुभव बताते हैं कि यहां इंसानी मांस तक बिकता है और सुपारी भी ली जाती है। अगर आप रेडिट पर इस दुनिया के किस्से खोजेंगे तो आपको ऐसा बहुत कुछ मिल जाएगा जो हैरान कर देगा।

डीप और डार्क वेब पर जाने के लिए यूजर्स टोर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं ताकि वो ट्रेस न हो सकें। इस सॉफ्टवेयर को पब्लिक डोमन में भी अमेरिका ने ही जारी किया है। यह सॉफ्टवेयर आईपी एड्रेस को हाइड कर देता है और यूजर की पहचान को गोपनीय रखता है। लेकिन अगर आप ट्रेस हो गए तो आपकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। इसलिए बेहद कम यूजर ही इंटरनेट की इस दुनिया में भ्रमण करते हैं। माना जाता है कि यहां जो भी जाता है वो सिर्फ क्रिमिनल एक्विटी के लिए ही जाता है।

2015 में नेचर मैग्जीन में एक शोध प्रकाशित हुआ था जिसमें कहा गया था कि गूगल पर सिर्फ 1 फीसदी ही इंफोर्मेशन मौजूद है। इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि डीप और डार्क वेब क्या चीज़ है? यहां आपको वो सारी चीज़ें मिल सकती हैं जो गूगल कभी नहीं बताता। यहां तक कहा जाता है कि सरकारों के गोपनीय राज भी यहां मौजूद हैं। यहां हजारों साइट्स और लिंक्स मौजूद हैं।

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