October 5, 2022

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छत्तीसगढ़ के किसानों ने महाराष्ट्र के किसानों से सीखे सीताफल उत्पादन के गुर

रायपुर (सुयश ग्राम) छत्तीसगढ़ के किसानों ने महाराष्ट्र के सीताफल उत्पादक किसानों से सीताफल उत्पादन और प्रसंस्करण की उन्नत तकनीक सीखी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के विस्तार सेवाएं निदेशालय में आज आयोजित प्रशिक्षण में अखिल महाराष्ट्र सीताफल उत्पादक प्रशिक्षण एवं संशोधन संघ के पदाधिकारियों द्वारा उन्नत सीताफल उत्पादन एवं प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी के बारे में स्थानीय किसानों को जानकारी दी गई। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा भी किसानों को सीताफल उत्पादन के संबंध में तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। सीताफल उत्पादक प्रशिक्षण एवं संशोधन संघ के पदाधिकारियों ने छत्तीसगढ़ के किसानों से अधिक से अधिक क्षेत्रफल में सीताफल का उत्पादन करने का आव्हान करते हुए इस हेतु आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग देने का आश्वासन दिया।
अखिल महाराष्ट्र सीताफल उत्पादक प्रशिक्षण एवं संशोधन संघ, पुणे के अध्यक्ष श्री श्याम गट्टानी ने कहा कि महाराष्ट्र के सीताफल उत्पादक किसानों द्वारा वर्ष 2003 में संघ का गठन किया गया। उस समय 27 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सीताफल का उत्पादन किया जाता था जो अब बढ़कर 75 हजार हेक्टेयर हो गया है। इस प्रकार महाराष्ट्र में सीताफल का रकबा प्रति वर्ष 5 हजार हेक्टेयर की दर से बढ़ रहा है। संघ द्वारा सदस्य किसानों को सीताफल उत्पादन की उन्नत तकनीक एवं प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण दिया जाता है और उनकी उत्पादन तथा विपणन संबंधी समस्याओं का निदान भी किया जाता है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार सेवाएं डाॅ. ए.एल. राठौर एवं कृषि वैज्ञानिकगण डाॅ. विजय जैन, डाॅ. जी.एल. शर्मा, डाॅ. हेमन्त पाणिग्रही, डाॅ. आर.एल. शर्मा एवं डाॅ. जी.एल. नाग ने भी संबोधित किया।

अखिल महाराष्ट्र सीताफल उत्पादक प्रशिक्षण एवं संशोधन संघ के लगभग सौ सदस्य किसानों ने कृषि विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण कर वहां संचालित गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने पाॅली हाऊस में उच्च मूल्य वाली फसलों की संरक्षित खेती का जायजा भी लिया। महाराष्ट्र से आए किसानों ने दुर्ग जिले के ग्राम धौराघाट में स्थापित देश के सबसे बड़े सीताफल प्रक्षेत्र जे.एस. फार्म तथा दुर्ग जिले के ही ग्राम अछोटी स्थित वरू कृषि फार्म का भ्रमण भी किया।

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