July 1, 2022

Suyashgram.com

मासिक पत्रिका एवं वेब न्यूज़ पोर्टल

छोटे से गांव में ऐसा विद्यालय, जहां बच्चों को पढ़ाया जाता हैं आधा का पहाड़ा

अंबिकापुर। संभाग मुख्यालय से 20 किलोमीटर के फासले पर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला नवगंई में बच्चों को कुछ ऐसी तालीम मिल रही है कि वे किताबी ज्ञान के साथ ही व्यवहारिक ज्ञान में निपुण हो गए हैं। जनरल नॉलेज के साथ ही जटिल गणित में माहिर कक्षा तीसरी से पांचवी तक के बच्चों की बौद्धिक क्षमता ऐसी कि श्यामपट्ट में बेहिचक गुणा-भाग करने के साथ ही इंग्लिश में एप्लीकेशन और माय सेल्फ जैसी जानकारियां लिख देते हैं। ग्रामीण परिवेश के बच्चों ने महंगे स्कूलों की तरह नर्सरी और एलकेजी, यूकेजी की शिक्षा नहीं ली, फिर भी ये निजी स्कूलों के बच्चों को मात दे रहे हैं।

अंबिकापुर-दरिमा मार्ग से होकर भट्ठापारा नहर के रास्ते से शासकीय प्राथमिक पाठशाला नवगंई में तीन से पांच किलोमीटर दूरी तय कर खजुरी, कतकालो, किशुनपुर तक के बच्चे पहुंचते हैं। दरिमा में दो निजी स्कूलों के अलावा शासकीय स्कूल भी है, लेकिन बच्चे इस विद्यालय में प्राथमिक ज्ञान की नींव मजबूत करने पहुंच रहे हैं।

अच्छी तालीम की ललक ऐसी की बरसात के मौसम में बच्चे स्कूल तक कीचड़ और मिट्टी से सने नहर मार्ग से पहुंच जाते हैं। नवगंई स्कूल की छात्रा इशिका पिता रामेश्वर सिंह, जिसे पेंसिल पकड़ना नहीं सीखा था, लेकिन गिनती-पहाड़ा के साथ ही सप्ताह के सात दिन और वर्ष के 12 माह को कंठस्थ बताने में माहिर थी।

माइसेल्फ व देश के प्रमुख हस्तियों के नाम उसने कंठस्थ कर रखा था। इसकी बौद्धिक क्षमता का आंकलन पूर्व कलेक्टर ऋतु सैन सहित शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों ने किया और प्रशासन की पहल पर होलीक्रॉस कान्वेंट स्कूल में प्रवेश कराया गया, वह वर्तमान में यहां कक्षा तीसरी में निःशुल्क अध्ययन कर रही हैं। हिंदी मीडियम से इंग्लिश मीडियम स्कूल में प्रवेश के बाद उसे थोड़ी दिक्कत जरूर हुई, लेकिन यह बच्ची अब पूरी तल्लीनता से यहां अध्ययन कर रही है।

नवगंई स्कूल के प्रधानपाठक रमेश कुमार शर्मा बताते हैं कि स्कूल का परीक्षा परिणाम बीते वर्ष शत-प्रतिशत रहा। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा और उनके बौद्धिक विकास का आंकलन मासिक टेस्ट से किया जाता है। अब तक पांचवी कक्षा तक के बच्चे अपने विषय संबंधित पाठ से संबंधित प्रश्नों को कंठस्थ कर लिए हैं। छोटी सी बस्ती में स्थित स्कूल में वर्तमान में 26 बच्चे अध्ययनरत हैं। स्कूल में एक महिला शिक्षिका निर्मला पंडो हैं, जो बच्चों का भविष्य गढ़ने में पीछे नहीं हैं।

निजी स्वामित्व की भूमि में स्कूल

1974 से स्थापित शासकीय प्राथमिक पाठशाला नवगंई के स्कूल भवन के लिए गांव के चमरा सिंह ने अपनी निजी भूमि दी थी। प्रधानपाठक कक्ष निर्माण के लिए इंद्रजीत सिंह ने भूमि उपलब्ध कराया। पहले खपरपोश मकान में लगने वाले स्कूल की सुध जिले के आला अफसरों ने ली एवं पुराने भवन को दुरुस्त कराया। बाउंड्री का भी निर्माण करा दिया गया है। अतिरिक्त कक्ष का निर्माण पूरा हो गया है। लेकिन खेल मैदान की अब भी कमी है।

जवाब देने में माहिर हैं बच्चे

बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ाने में प्रधानपाठक रमेश कुमार शर्मा की भूमिका अहम है। राष्ट्रीय चिन्ह, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय पशु पक्षी, राष्ट्रीय वृक्ष, राष्ट्रीय आदर्श वाक्य, राष्ट्र की मूल विशेषता, राष्ट्रपिता, वर्तमान राष्ट्रपति व उप-राष्ट्रपति सहित प्रमुख मंत्रियों एवं कमिश्नर, कलेक्टर, एसपी समेत प्रदेश के 29 जिले जैसे कई प्रश्नों का हाजिर जवाब देने के लायक बच्चे हैं।

इसके अलावे फर्स्ट डे-लास्ट डे ऑफ वीक, वर्ष का पहला और सबसे छोटा माह, पर्यायवाची शब्द आदि जानकारियां देने में ये माहिर हैं। यही कारण है कि इस स्कूल के कई बच्चे पांचवीं के बाद शहर के अच्छे स्कूलों में तालीम ले रहे हैं। कुछ गरीब बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा मिल रही है।

Spread the love

You may have missed