October 5, 2022

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जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ से हटेगा ये कांग्रेस शब्द : अजीत जोगी

रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के अध्यक्ष अजीत जोगी ने विधानसभा चुनाव बाद अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में माना कि चुनाव में उनका बड़ा नुकसान उनके नाम के साथ कांग्रेस का जुड़ा होना है। लोगों ने पार्टी के प्रचलित नाम जोगी कांग्रेस के पक्ष में मतदान तो किया पर बटन पंजा पर ही दबाया। इसलिए पार्टी के नाम को परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।

सागौन बंगला पर आयोजित प्रेसवार्ता में जोगी शायराना अंदाज में दिखे। जोगी ने कहा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी अपने नए नाम के साथ मैदान में आएगी। बसपा के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर पार्टी राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी दखल देगी। जोगी ने कांग्रेस सरकार के कर्जमाफी का स्वागत तो किया पर कहा कि अभी केवल अल्पकालीन कर्ज माफ किया गया है। कांग्रेस ने पूर्ण कर्जमाफी का वादा लोगों से किया था।

सागौन बंगला पर आयोजित प्रेसवार्ता में जोगी ने शुरूआत ही की कि वो चिराग और होंगे जो तेज हवाओं से बुझते हों, हमने तो जलने का हुनर ही तूफानों से सीखा है..। अजीत जोगी ने जनता के प्रति धन्यवाद जताया तथा कहा कि चुनाव में गठबंधन ने सात सीटें जीतीं। अकलतरा, चंदरपुर और तखतपुर जैसी सात अन्य सीटों बहुत कम अंतर से हारे तथा 15 सीटों में हमारे उम्मीदवारों को 30 फीसद से ज्यादा वोट मिला। 11 लोकसभा सीटों में जांजगीर व बिलासपुर में हमारे वोट राष्ट्रीय दलों से अधिक है। हमें राज्य की 14 फीसद जनता ने जनादेश दिया है।

नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव लड़ेगी पार्टी

जोगी ने कहा कि जकांछ नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव भी लड़ेगी। चुनाव चिन्ह सभी तक पहुंचाने में पंचायत चुनाव बड़ी भूमिका निभाएगा। पार्टी बसपा के साथ पूरी दमदारी से लोकसभा चुनाव भी लड़ेगी।

आदिवासी मंत्री बनाना चाहिए था

जोगी ने कांग्रेस को सलाह देते हुए कहा कि वह भाजपा वाली गलती न करे। आरक्षित 27 व दो सामान्य सीटों पर आदिवासी समाज के विधायक निर्वाचित हैं पर प्रथम मंत्रिमंडल में एक भी आदिवासी समाज के प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया। पार्टी को प्रथम कैबिनेट में एक आदिवासी को शामिल करना चाहिए था।

होनी चाहिए पूर्ण कर्जमाफी

नई सरकार द्वारा किसानों को 2500 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और सहकारी बैंकों से लिए गए कर्ज की कर्जमाफी के निर्णय का हम स्वागत करते हैं। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि 90 फीसद किसानों ने साहूकारों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं जैसे नाबार्ड आदि से कर्ज लिया हुआ है। उन्हें कर्जमाफी का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा। इसे सिर्फ सहकारी बैंकों तक क्यों सीमित कर रखा है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान किसानों के सभी प्रकार के ऋण की एकमुश्त कर्जमाफी की घोषणा की थी। ऐसा ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को भी करना चाहिए। तभी उनका चुनाव पूर्व जन घोषणा पत्र में किया गया वादा पूरा होगा।

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