December 2, 2022

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जमीन में बना नहर, मुआवजा के लिए डेढ़ साल से भटकता रहा जमीन मालिक, सरपंच के दादा ने निकाल लिया मुआवजे का पैसा

बालोद। डिलेश्वर देवांगन। जिले में अब सरपंच के साथ साथ उनके परिवार के सदस्य भी अपनी मनमानी पर उतर आये हैं। अब तक सरपंच की शिकायत जनदर्शन में होती थी लेकिन मंगलवार को सरपंच के पिताजी व दादाजी की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचकर एक ग्रामीण ने की। जिनका कहना है कि दो साल पहले उन्होंने सरपंच के पिताजी के पास से खेत खरीदा। जिसमें से 7 डिसमिल में नहर का निर्माण वर्ष 2017 में हुआ। खेत का वर्तमान मालिक मुआवजे के लिए डेढ़ साल से प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटता रहा। बाद में उन्हें पता चला कि सरपंच के दादा ने मुआवजे का पैसा निकाल लिया है।

दरअसल मामला गुण्डरदेही ब्लाॅक के ग्राम कोड़ेवा का है। जहां पहले तो सरपंच की मनमानी सामने आ रही थी अब उन्हें देख उनके परिवार के लोग भी मनमानी पर उतर आये। मंगलवार को सिकोसा के एक ग्रामीण जो सरपंच के परिवार से परेशान तो हैं इसके साथ साथ जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों से भी नाराजगी जाहिर की। सिकोसा निवासी बिसराम कुम्हार ने बताया कि वह 16 जून 2015 को कोड़ेवा सरपंच के जीवन बंधे के पिताजी सीताराम से 0.11, 0.05 हेक्टेयर भूमि रजिस्ट्री कर खरीदी किया और उक्त भूमि का 20 अगस्त 2015 को प्रमाणीकरण कर अपने नाम पर वर्तमान राजस्व अभिलेख में दर्ज करा दिया। इसके बाद उसी वर्ष उनके भूमि क्रय कर अपने नाम करा लेने के बाद उस भूमि में से 0.01, 0.05 व 0.02 हेक्टेयर शासन द्वारा अधिग्रहण कर नहर नाली का निर्माण किया गया।

कहीं नहीं जिसका नाम, उसने लिया मुआवजा

बिसराम ने बताया कि वह कोड़ेवा सरपंच जीवन बंधे के पिताजी सीताराम के पास से जमीन खरीदा था। उक्त भूमि को शासन द्वारा अधिग्रहण किया गया जिसका मुआवजा राशि सीताराम अपने पिता भुनेश्वर ने आहरण करा लिया। जबकि उक्त भूमि भूनेश्वर के नाम पर दर्ज ही नहीं था। इस प्रकार फर्जी और अवैधानिक रूप से सीताराम द्वारा अपने पिता भुनेश्वर के नाम से पर भूमि का मुआवजा राशि का आहरण किया गया है। बिसराम ने मंगलवार को जनदर्शन में पहुंचकर अपनी पीड़ा बताई और मुआवजा राशि दिलान सहित फर्जी रूप से राशि आहरण करने वालों पर सख्त कार्यवाही की मांग की।

कैसे निकली राशि, प्रशासनिक अफसरों की संलिप्तता का लग रहा आरोप

बिसराम ने बताया कि जब उन्हें ज्ञात हुआ कि उनके जमीन के कुछ हिस्से में नहर नाली का निर्माण किया जायेगा तब से लेकर वह लगातार अपने ब्लाॅक के राजस्व विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगा रहा था। पहले पटवारी फिर तहसीलदार से मुआवजे को लेकर कई बार चक्कर लगाये। लेकिन तहसीलदार कहते थे कि आपके नाम से कोई जमीन ही नहीं है तो फिर मुआवजा क्यों देंगे। क्योंकि पहले से मुआवजा किसी और को दिया जा चुका था। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जिनके नाम से जमीन ही नहीं है उन्हें मुआवजे की राशि कैसे मिल गई और राजस्व विभाग के जिम्मेदारों ने क्यों ध्यान नहीं दिया। जिससे राजस्व विभाग के जिम्मेदारों की संलिप्तता का आरोप लग रहा है।

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