December 2, 2022

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डेंगू से लोग परेशान प्रशासन कह रहा सब कंट्रोल में है।

दुर्ग। रीतेश तिवारी। बेलगाम हुआ डेंगू कलेक्टर के दावे खोखले सरकारी अस्पतालों में बदहाली का आलम। निःशुल्क जांच इलाज के नाम पर भटक रहे मरीज। 40 घंटे बाद भी डेंगू रिपोर्ट भी मिलना मुश्किल। केंद्रीय जाँच टीम पहुंची दुर्ग। भिलाई के कई छेत्रो का कर रही निरक्षण। डेंगू वाइरस की गहन पड़ताल में जुटा एनसीडीसी की टीम।

दुर्ग भिलाई के हजारो लोग इन दिनों डेंगू वाइरस के चपेट में जकड़े हुए है। शहर के कई वार्डो में कोई न कोई डेंगू बिमारी से ग्रसित मिल रहा है। पिछले 18 दिनों में 21 मौत डेंगू के खतरनाक वाइरस से हो चुकी है। लगातार डेंगू के मरीजों में इजाफा हो रहा है। स्वक्ष भारत की तस्वीर में ऐसा वाइरस फैला की हजारो लोग इस अनजानी बिमारी से प्रभावित हो चुके है। कई मासूम बच्चो की मौत हो चुकी है तो कई गंभीर हालात में अभी भी आईसीयू में भर्ती है। कलेक्टर डॉ उमेश कुमार अग्रवाल के दावों के बावजूद भी हालत और बिगड़ते जा रहे है। आलम यह है की सरकारी अस्पतालों में कोई देखने वाला तक नही है। भिलाई दुर्ग में दो बड़े सरकारी अस्पताल भी बेलगाम हो चुके है। निःशुल्क जांच रिपोर्ट और इलाज के नाम पर डेंगू पीड़ित मरीज सिर्फ अस्पतालों में भटक रहे है। न कोई जुम्मेदार अधिकारी न कोई जुम्मेदार डाक्टर इन पीड़ित मरीजों की सुध लेने को तैयार है। वाट्सअप फेसबुक में सब कुछ बेहतर बताया जरूर जा रहा है लेकिन हालात और भी बिगड़ते जा रहे है। अस्पतालों की लगती भीड़ और दर्द से कराहती आवाज ने सरकारी सिस्टम की वयवस्थाओ की सारी पोल खोल कर रख दी है। स्वास्थ विभाग सरकारी अफसर भले ही सब जल्द ठीक होने की बात कह रहे है लेकिन हालात इतने बिगड़ चुके है की दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार को डेंगू पीड़ितों की आवाज ने झकझोर दिया है। केंद्र सरकार ने डेंगू वाइरस की रोकथाम के लिए एक जांच दल भेजा है। जाँच टीम में एनसीडीसी के सहायक निर्देशक डॉ अमर भदौरिया अपनी टीम के साथ प्रभावित छेत्रो का दौरा कर रहे है। डेंगू वाइरस के फैलने और दवा के बाद भी बेलगाम होने की वजह तलाश रहे है।

छत्तीसगढ़ स्वास्थ विभाग डेंगू के वाइरस का भी सही तरीके से पता लगाने में नाकाम हो चुकी है। 18 दिनों में डेंगू वाइरस किस रूप में इतनी तेजी से फ़ैल रहा है इसका पता लगाने में भी असफल हो चुके है। सरकारी अस्पतालों में बदहाली के चलते प्राइवेट पैथॉलॉजी में पीड़ित डेंगू जांच के लिए 700 से लेकर 1200 रूपए दे रहे है और स्वास्थ मंत्री अजय चंद्राकर कहते है की हमने सब कुछ तो फ्री कर दिया है लोग परेशान न हो सब फ्री है। कुछ भी फ्री नहीं है जनाब 21 मासूम निर्दोष लोगो की मौत जरूर फ्री में हो चुकी है और न जाने कितने लोग अभी भी फ्री के कतार में खड़े है। चाहे सरकारी अस्पताल हो या प्राइवेट हालात सब जस के तस है हर जगह सिर्फ लूट मच्छी है। डेंगू के चलते लोग मर भी रहे है और लूट भी रहे है। राजधानी से महज 35 किलोमीटर की दुरी पर 21 मासूम लोगो की मौत होने के बाद भी हालात सभालने न स्वास्थ मंत्री आये और न ही कोई बड़ा नेता । किसी को कोई फुरसत नही है किसी का दर्द समझने का। जिला प्रशासन भले ही इन दिनों दौड़ रहा हो सड़को पर लेकिन अंदर के हालात और ही खराब होते जा रहे है।
जरूरत है आप सभी को सभलने की एक दूसरे को समझाने की खुद की सुरक्षा और जबावदेही की आस पास साफ़ सुथरा रखे मच्छरों से बचे संदेह होने पर तत्काल डाक्टर को दिखाए वरना सिर्फ अफ़सोस के अलावा कुछ नहीं कर पाएंगे। जरूरत है उन तमाम युवा साथियो की जो आगे आये और लोगो को जागरूक करे बताये कैसे बचा जा सकता है डेंगू वाइरस से। सोशल मिडिया फेसबुक और कई तकनिकी तरीके है लोगो को समझाने की उन्हें बचाने की मदत करने की निशुल्क इलाज के चक्कर में कई लोग अपनी जान गवा चुके है तो कई आज भी फ्री इलाज कराने की कतार में खड़े है मज़बूरी है उन तमाम गरीबो के पास जिनके पास आज भी दो वक्त की रोटी का सही तरीके से जुगाड़ नहीं कर पाते वो कैसे अपना इलाज कराये उनको तो पता है नहीं डेंगू का होता है। उन तक हम सब की जुम्मेदारी बनती है उन्हें सभालने की समझाने की बचाने की

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