December 2, 2022

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दुर्ग जिले में डेंगू से अब तक 29 मौत: प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और दुर्ग प्रभारी मंत्री 22 दिन नही तय कर सके राजधानी से 35 किमी की दूरी,

दुर्ग। रीतेश तिवारी। दुर्ग जिला इस वक्त डेंगू वाइरस की अंदरूनी मार झेल रहाहै। कौन बच्चा कौन बूढ़ा और कौन जवान सभी इस खतरनाक वाइरस के चपेट में शामिल है। 31 जुलाई से लगातार हर रोज भिलाई के कई वार्डो में मातम पसरा हुआ है। किसी न किसी की मौत डेंगू से हर रोज हो रही है। ऐसा कोई दिन नहीं जब मौत का कहर किसी न किसी घर पर न बरसा हो।

स्थानीय नगरीय निकाय की घोर लापरवाही के चलते खतरनाक वाइरस को दुर्ग में घर बसाने का भरपूर मौका दिया गया और आज ऐसे हालात पैदा हो गए है की हर कोई इस वाइरस से सहम उठा है। थोड़ी सी तकलीफ में भी अस्पतालों के चक्कर काटने में मजबूर हो गया है। डेंगू ने ऐसा विकराल रूप धारण किया की कई घरो में परिवार के सभी सदस्यों को अपनी चपेट में ले लिया आलम यह है की कौन किसका ध्यान रखे कौन किसका परख करे सभी अस्पतालों में गंभीर रूप से भर्ती है। कुछ का हाल तो और बुरा है एक ही परिवार के कई लोग पीड़ित हुए है जिनमे कोई दुर्ग अस्पताल में तो कोई रायपुर अस्पताल में मौत से लड़ाई लड़ रहा है एक दूसरे को समझने समझाने का भी मौका नहीं मिल पा रहा है। मौत के इस वाइरस से 23 दिनों में 29 लोग अपनी जान गवा चुके है जिनमे अधिकत्तर बच्चे शामिल है।

डेंगू से लोगो में इतना डर पैदा हो गया ही की अब जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में भी भर्ती के वक्त वार्डो में मच्छरदानी लगा रहे है।

अभी भी 651 डेंगू पीड़ित भर्ती निजी और सरकारी अस्पतालों में इलाज जारी
बीजेपी की राज्य सभा सदस्य डॉ सरोज पांडे डेंगू के विकराल रूप से चिंतित। केंद्रीय स्वास्थ मंत्री से मुलाकात कर बेहतर डाक्टरों की टीम जल्द से जल्द दुर्ग भेजने की लगाईं गुहार। कथित डेंगू से जहा 23 दिनों में 29 बेकसूरों की मौत खतरनाक वाइरस से हो जाये वहा भयभीत होना लाजमी है। अपुष्ट आंकड़ो के अनुसार 1700 लोग डेंगू वाइरस से मुक्त होकर अस्पतालों से अपने घर जा चुके है। तो वही दुर्ग भिलाई में अभी भी 651लोग डेंगू से पीड़ित है। और इनका सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है जो हर दिन भगवान् से जिंदगी की दुआए मांग रहे है ।

52 डेंगू पीड़ित रायपुर रेफर
मिली जानकारी के अनुसार 52 गंभीर डेंगू पीड़ित को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के कई बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है जहा इलाज के दौरान 9 लोगो की मौत हो चुकी है। शहरी छेत्रो को क्लीन सिटी बनाने वालो ने ऐसा क्लीन किया है की 29 मासूम लोगो की जीवनलीला ही क्लीन हो गयी और न जाने अभी कितने इस क्लीन सिटी के कतार में खड़े है।

जिला प्रशासन और स्थानीय नगरीय निकाय के अधिकारियो ने अवार्ड पाने और अखबारों में तस्वीर छपवाने की होड़ में पुरे शहर की खुशमिज़ाज जिंदगी को दाव पर लगा दिया। डेंगू वाइरस कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है जिसकी गलती कुदरत को माने ये प्रशासनिक अधिकारियों की घोर लापरवाही का नतीजा है जिसके कारण पूरा शहर डेंगू से पीड़ित हो गया है और आज ये महामारी का रूप ले चुका है।

कलेक्टर एडीएम से लेकर स्वास्थ महकमा इन दिनों गली मुहल्ले में भटक रहा है लोगो को समझाइस के साथ-साथ उनके बेहतर इलाज की भरकस कोशिस भी कर रहे है लेकिन शुरआती इस खतरनाक वाइरस को अनसुना करने की बड़ी भूल कर गए जिसका नतीजा कई जिंदगी अपनों से मजबूरन रूठ गई ?

जनप्रतिनिधि एवं मंत्री नदारत

जिस प्रदेश के एक जिले मे 23 दिन में 29 मौत हो चुकी हो वह भी महज राजधानी से 35 किमी दूर। वहां मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय के अलावा न तो प्रदेश के स्वस्थ्य मंत्री श्री अजय चंद्राकर न ही जिला प्रभारी मंत्री श्री राजेश मूणत 22 दिन में 35 किमी की यात्रा करना उचित नही समझे। राजधानी में ही बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया में वचाव के तरीके बताते रहे। एक बार भी अपने प्रभार जिले के पीड़ित लोगो तक पहुंचना उचित नहीं समझ रहे उनके आने से लोगो की तकलीफ बढ़ नही जाएगी और न ही खत्म हो पायेगी लेकिन शहर की पीड़ित जनता पूछ रही है की चुनाव के दौरान हर रोज गली मुहल्ले में घूमने वाले नेता आखिर गए कहा?

कलेक्टर कह रहे हालात काबू में

कलेक्टर डॉ उमेश कुमार अग्रवाल के मुताबिक हालात अब काबू में है डेंगू मरीजों की संख्या कम होने लगी है लोगो में जागरूकता बढ़ी है धीरे धीरे हालात बेहतर हो जायेंगे। साहेब हालत जरूर एक दिन बेहतर तो हो ही जायेंगे सब भूल भी जायेंगे की कभी डेंगू ने महामारी का विकराल रूप धारण किया था लेकिन 29 मौत जिनमे अधिकाँश मासूम बच्चे शामिल थे वो पूछ रहे है की आखिर हमारा कसूर क्या था घर से स्कूल के लिए ही निकले थे फिर ये डेंगू मच्छर कहा से आ गया साहेब ?

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