January 30, 2023

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न्यायमूर्ति श्री बाजपेयी एवं मुख्य सूचना आयुक्त श्री राउत ने किया नितिंन सिंघवी द्वारा लिखित ” जानिए अपने सूचना का अधिकार” पुस्तक का विमोचन,

रायपुर।10 दिसम्बर। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष तथा हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति मान. न्यायमूर्ति चन्द्रभूषण बाजपेयी (छ.ग. उच्च न्यायालय के पूर्व जज) ने आज नितिन सिंघवी द्वारा लिखित पुस्तक “जानिये अपना सूचना का अधिकार” का विमोचन स्थानीय एक होटल में किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के मुख्य सूचना आयुक्त श्री एम.के.राउत ने की। विशिष्ठ अतिथि श्री आनंद तिवारी (से.नि. अति. पुलिस महानिदेशक) थे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अजित डेग्वेकर ने किया।

न्यायमूर्ति श्री बायपेयी ने कहा कि समाज मे बदलाव करने के लिए आम नागरिक को जागरूक होना पड़ेगा। अपने अधिकार प्राप्त करने के लिए समाज मे जागरूकता जरूरी है। सूचना का अधिकारअधिनियम अपने अधिकार प्राप्त करने और व्यवस्था में सुधार हेतु महत्वपूर्ण कानून है जिसका उपयोग सकारात्मक होना चाहिए। नितिंन सिंघवी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम पर लिखी पुस्तक बहुत ही सरल भाषा मे है।

मुख्य सूचना आयुक्त श्री राउत ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम आने से शासकीय अधिकारियों एवं शासकीय कार्यों में जवाबदेही के साथ साथ पारदर्शिता बढ़ी है। सूचना का अधिकार अधिनियम इतना बढ़िया कानून है जिसमे पिछले 13 वर्षों में कोई संसोधन नही हुआ और अगले कई वर्षों तक कोई संसोधन होने की उम्मीद नही है।

श्री आनन्द तिवारी ने सूचना का अधिकार अधिनियम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका उपयोग आम जन को करना चाहिए, यह जन अधिकार हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

गौरतलब है कि भारत के पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त ने की है इस पुस्तक की समीक्षा है:-

श्री सत्यानंद मिश्र (रिटा. आई.ए.एस.) एवं भारत के पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त ने इस पुस्तक की समीक्षा करते हुऐ लिखा है कि:-

“ मैंने इस पुस्तक की पाण्डुलिपि का अध्ययन करने के बाद पाया है कि इसमें सूचना के अधिकार अधिनियम के लगभग सभी प्रावधानों का विस्तृत एंव सरल व्याख्या की गई है एवं व्यवहारिक दृष्टि से समझाईश दी गई है ताकि सूचना पाने के इच्छुक नागरिकों को पता चले कि किस हद तक सूचना मिल सकती है एवं शासन के कार्यरत सूचना अधिकारी को भी स्पष्ट समझ रहे कि कौन सी सूचना देना उनके लिए न्यायोचित है। यह पुस्तक काफी मेहनत एवं प्रतिबद्धता के साथ लिखी गई है।”

श्री सत्यानंद मिश्र ने पुस्तक की प्रस्तावना मंे लिखा है कि:-

“केन्द्रीय सूचना आयोग में मेरे अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हॅंू कि यह पुस्तक सूचना के अधिकार को और समृद्ध एवं सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। यह पुस्तक व्यापक रूप में प्रशासन एवं नागरिकों के बीच उपलब्ध हो यह प्रयास करना चाहिए।”

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