December 2, 2022

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बाल संप्रेक्षण गृह से 13 अपचारी बालक हुए फरार, भागने के दौरान एक बालक के नाले में डूबने की आशंका से पुलिस और प्रशासन में मचा हड़कंप।

दुर्ग। रीतेश तिवारी। शहर की दुनिया से दूर जंगलो के करीब बना है जिले का बाल संप्रेक्षण गृह। जहा पिछले 5 सालों से लगातार अपचारी बालक दर्जनों की संख्या में रफूचक्कर हो रहे है कभी ये दिन के उजाले में गायब हो जाते है तो कभी ये अंधेरी रातो में।

रविवार की रात भी लगभग एक से दो बजे के करीब बाल संप्रेक्षण गृह के कमरों में जंग लगे लोहे के रोशनदान को तोड़ कर एक दो नही कुल 13 अपचारी बालक फरार हो गए और किसी को खबर तक नही लगी। गृह से भागने के बाद सभी बालक पुलगांव नाले में भरे लबालब पानी को पार करते हुए शहर की ओर भागने में कामयाब हो गए लेकिन एक बालक की नाले में डूबने की आशंका को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

तलास रहे गोताखोर

लगातार गोताखोरों की मदत से तलाश की जा रही है लेकिन अभी तक कोई खबर नही मिली बालक डूबा भी है या नही इसकी भी कोई पुष्टि नही हो पा रही है । एतिहातन पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है।

साथी ने डूबने की आशंका की जाहिर
भागे हुए 13 बालको में से तीन बालक पुलिस को मिल चुके है। मिले हुए तीन बालको में से एक बालक ने दूसरे 13 साल के बालक की नाले में डूबने की घटना को लेकर शंका जाहिर की, उसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस प्रशासन सरगर्मी से बच्चो की तलाश की कर रहा है।

ये कोई पहला मामला नही है जब अपचारी बालक फरार हुए है। पिछले कई सालों का अगर आंकड़ा देखे तो आप हैरान हो जाएंगे यह जान कर की हर दूसरे महीने बाल संप्रेक्षण गृह से कोई न कोई अपचारी बालक भागने में कामयाब हो चुका है वो भी दर्जनों की तादात में।

जिले के महिला एवं बाल विकास अधिकारी, बाल संप्रेक्षण अधीक्षक, संस्थाओं के संरक्षण अधिकारी सहित उन सभी अधिकारियों को जो इस बाल संप्रेक्षण गृह की रूपरेखा तैयार करने में जुटे हुये है, उन्हें तो राज्य सरकार से अवार्ड मिलना चाहिए!

प्राप्त जानकारी के अनुसार बाल संप्रेक्षण गृह में कोई भी नियमित अधीक्षक नही है यानी प्रभार से काम चल रहा है। रात में कोई अधीक्षक या अधिकारी नही ठहरता यानी सब कुछ भगवान भरोसे। सुरक्षा के नाम पर टूटी हुई बाउंड्रीबाल और दो नगर सेना के सिपाही बस इन्ही के भरोसे 70 अपचारी बालको की सुरक्षा का बंदोबस्त है जिसका नतीजा आये दिन बच्चे भाग रहे और किसी न किसी अनहोनी का शिकार भी हो रहे है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

इस घटना के बाद किसी भी अधिकारी पर कार्यवाही भले हो न हो लेकिन कलेक्टर साहेब ने एक बड़ा आदेश जरूर निकाल दिया है कोई भी इंसान बाल संप्रेक्षण गृह बालक गृह या कोई भी बच्चो के गृह में प्रवेश नही करेगा। इस आदेश पर सवाल खड़े होने लगे हैं कि क्या यह सुरक्षा की दृष्टि से आदेश जारी हुआ है या चल रही लापरवाही को छुपाने की दृष्टि से?

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