December 2, 2022

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बड़ी खबर: अब वकील ही नही एमबीए डिग्री धारक भी होंगे देशभर के न्यायालय में, सुप्रीम कोर्ट ने एमबीए डिग्री वालों की अदालत प्रबंधकों की नियुक्ति का दिया सुझाव

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को कहा कि देश भर में अदालतों में बुनियादी सुविधाओं को ज्यादा तरजीह नहीं दिया गया और देश के दूर दराज के इलाकों में ये सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ऐसी सुविधाओं को रेखांकित किया जिसे देश के सभी कोर्ट परिसरो में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सभी न्यायिक जिलों में एमबीए डिग्रीधारी अदालत प्रबंधकों की नियुक्ति की जानी है ताकि अदालत का प्रशासन सक्षमता से संचालित किया जा सके।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा, “…अदालतीय बुनियादी सुविधाएं जिसे अगर नजरअंदाज नहीं किया गया है तो अपेक्षाकृत कम महत्त्व दिया गया है। इसमें रद्दोबदल करने की करने की जरूरत है। महानगरीय शहरों और राज्य की राजधानियों को छोड़कर, कोर्ट की बुनियादी संरचनाएं विशेषकर देश के अंदरूनी इलाके में दम तोड़ रही हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि इनमें से कुछ तो अंतिम सांसें गिन रही हैं”।

गुरुवार को पीठ ने कहा, “हम समझते हैं कि इस बारे में निम्नलिखित निर्देश जारी करना उचित होगा:-

देश भर के अदालत परिसरों में निम्नलिखित बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। इनमें शामिल हैं मुकदमादारों और वकीलों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह, बैठने की व्यवस्था के साथ प्रतीक्षा करने के लिए पर्याप्त जगह जिसमें प्रकाश, बिजली, वातानुकूलन/एयर कूलिंग/उस जगह को गरम रखने की व्यवस्था, पीने के साफ़ पानी के लिए आरओ की सुविधा, महिलाओं, पुरुषों, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगों के लिए अलग-अलग साफ़ और स्वच्छ शौचालय, खाने पीने की वस्तुओं की बिक्री के लिए किओस्क जिसको अगर संभव है तो कोर्ट के स्टाफ ही चलाएं। ये सुविधाएं देश भर के हर कोर्ट परिसर में उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अगर ये सुविधाएं कोर्ट परिसरों में नहीं हैं, तो इस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

पेशेवर अदालत प्रबंधकों की अवश्य ही नियुक्ति की जानी चाहिए और अगर वे एमबीए डिग्रीधारी हों तो ज्यादा बेहतर है। इस तरह के पद सभी न्यायिक जिलों में बनाए जाने चाहिएं ताकि वह कोर्ट प्रशासन में और प्रमुख जिला और सत्र जजों की मदद कर सकें।

इसके बाद एमबीए प्रबंधकों के लिए न्यायालय में नियुक्ति के रास्ते खुल गए हैं।

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