July 5, 2022

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बड़ी खबर: भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तारी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, 3:45 से कोर्ट में सुरु होगी सुनवाई, कौन है सुधा भारद्वाज जिनकी गिरफ्तारी पर मचा देश भर में हंगामा?

नई दिल्‍ली, एजेंसी। कथित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्‍या की साजिश में गिरफ्तार माओवादी कार्यकर्ताओं का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। रोमिला थापर, प्रभात पटनाइक, सतीश देशपांडे, माया दरनाल और एक अन्य व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में सुधा भारद्वाज और गौतम नवलेखा की गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्‍वीकार कर ली है और मामले की सुनवाई दोपहर 3:45 बजे करेगा।

सुधा भारद्वाज को गुरुवार को हाईकोर्ट में किया जाएगा पेश
भीमा-कोरेगांव हिंसा के मामले में घर में ही नज़रबंद की गईं मानवाधिकार वकील सुधा भारद्वाज के बारे में हरियाणा में एनआइटी फरीदाबाद की डीसीपी ने बताया कि उन्हें कल यानि गुरुवार को हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा। तब तक वह पुलिस की निगरानी में रहेंगी। कोर्ट में पेश होने तक मीडिया को उनसे बात नहीं करने दी जाएगी, लेकिन वह अपने वकीलों से मुलाकात कर सकती हैं।

अगर सरकार पेश नहीं कर पाई साक्ष्‍य…
जेडीयू नेता पवन वर्मा ने भीमा कोरेगांव हिंसा में वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी के मुद्दे पर कहा कि सरकार को इन माओवादी एक्टिविस्ट के खिलाफ सूबूत पेश करने ही होगें। अगर सरकार मजबूत साक्ष्‍य पेश करने में असफल रहती है, तो यह साफ तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन माना जाएगा।

पीएम मोदी की हत्या की साजिश के सिलसिले में पुणे पुलिस ने मंगलवार को देश के छह राज्यों में छापे मारकर पांच माओवादी कार्यकर्ताओं को पकड़ा है। इन सभी को इसी साल जून में गिरफ्तार किए जा चुके पांच माओवादियों से पूछताछ के आधार पर पकड़ा गया है। पुणे पुलिस के मुताबिक, सभी पर प्रतिबंधित माओवादी संगठन से लिंक होने का आरोप है, जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे सरकार के विरोध में उठने वाली आवाज को दबाने की दमनकारी कार्रवाई बता रहे हैं। रांची से फादर स्टेन स्वामी, हैदराबाद से वामपंथी विचारक और कवि वरवरा राव, फरीदाबाद से सुधा भारद्धाज, ठाणे से अरुण परेरा और दिल्ली से सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलाख की गिरफ्तारी हुई है।

कौन है सुधा भारद्वाज

सुधा भारद्वाज एक वकील और एक्टिविस्ट हैं। इसके साथ ही वह दिल्ली के लॉ यूनिवर्सिटी में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर पढ़ाती भी हैं।

बता दें कि सुधा के पिता रंगनाथ भारद्वाज देश-विदेश के जाने-माने अर्थशास्त्री थे। वहीं उनकी मां कृष्णा भारद्वाज दिल्ली के जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में इकॉनमिक्स डिपार्टमेंट की डीन हुआ करती थीं. वह अमर्त्य सेन की समकालीन थीं. सुधा का जन्म अमेरिका में साल 1961 में हुआ था और वहीं उनकी प्राइमरी शिक्षा हुई. लेकिन साल 1971 में वह अपनी मां के साथ भारत लौट आईं।

अमेरिका की नागरिकता छोड़ने वाली आईआईटी टॉपर सुधा साल 1978 की कानपुर आईआईटी टॉपर हैं। बाद के दिनों में उन्होंने अमेरिका की अपनी नागरिकता छोड़ दी और दिल्ली में झुग्गी-मजदूर बस्तियों के बच्चों के लिए काम करना शुरू कर दीं। इतना ही नहीं वह बच्चों को पढ़ाती थीं और मजदूरों को जागरुक करने के साथ-साथ उनके अधिकारों के लिए काम करती थीं।

1984 से कर रही हैं काम साल 1984-85 में मध्यप्रदेश के इलाके (अब छत्तीसगढ़) में शंकर गुहा नियोगी मजदूर आंदोलन चला रहे थे। सुधा इस आंदोलन से प्रभावित हुईं और उनके साथ जुड़ गईं। इसी दौरान उन्हें वकीलों की जरूरत होती थी, जिसके लिए बाद में 40 की उम्र में उन्होंने वकालत की डिग्री ली। इससे वह मजदूरों और आदिवासियों के न्याय के लिए उठ खड़ी हुई।

सुधा भरद्वाज

ट्रेड यूनियन में भी रही हैं शामिल सुधा तकरीबन 35 साल से छत्तीसगढ़ में मजदूर, किसान और गरीबों की लड़ाई लड़ रही हैं। बताया जाता है कि वह बिना फीस लिए गरीबों का केस लड़ती हैं। वह ट्रेड यूनियन में भी शामिल हैं। साथ ही वह दिल्ली न्यायिक अकादमी का भी एक हिस्सा हैं। वह श्रीलंका में लेबर कोर्ट के अधिकारियों को भी संबोधित कर चुकी हैं। बता दें कि साल 2007 स् सुधा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में बतौर वकील कार्यरत हैं। हाईकोर्ट ने उन्हें राज्य स्तरीय सेवा प्राधिकरण का सदस्य भी नियुक्त किया है।

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