December 2, 2022

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हाथियों की समस्या को हाथियों के दृष्टिकोण से देखें तभी समस्या का समाधान निकलेगा, कुनकी लाके बांधने से नहीं – नितिन सिंघवी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बढ़ रहे हाथी मानव द्वंद को कम करने और हाथियों के संरक्षण के लिए पर्यावरण एवं वन्य जीव प्रेमी रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को सुझाव प्रेषित किया गया है। कि मानव हाथी द्वन्द कम करने के लिये पहला कदम वन हाथी परिवारों तथा उनके सदस्यों का (Identification) पहचान किया जाना चाहिए। वन हाथियों के परिवार और सदस्यों के बिना पहचान के ना हम वन हाथियों की रक्षा कर पायेंगे और ना ही हाथी मानव द्वन्द कम कर पायेंगे।

कैसे पहचान सकते हैं हाथी को

सुझाव में कहा है कि प्रत्येक हाथी के कान के कोने अलग-अलग रूप से कटे होते है जो कि कैंची के काटे जाने के समान दिखते है, कई हाथियों के कान में परमानेंट छिद्र भी रहते हैं। पहचान के लिखे मुख्य रूप से दोनों कानों की फोटो ली जाती है। अफ्रीका में यह कार्य 50 वर्षों से अधिक (जब टेक्नालाजी विससित नहीं थी) से चल रहा है। वन हाथियों का व्यवहार का अध्ययन करने वाली प्रसिद्ध लेखिका सिन्थिया मौस 80 के दशक में 650 वन हाथियों को खींची गई फोटो द्वारा प्राप्त Identification के आधार पर प्रत्येक वन हाथी को पहचानती थी। पहचान करने के लिए उपलब्ध अन्य तकनीकी का भी उपयोग किया जा सकता है। पहचान करके ही हम वन हाथियों के परिवार-स्वभाव को समझ सकते है। कुनकी लाके बांधकर रखने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

प्रदेश में 8 माह में मरे 8 हाथी

सुझाव में चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में हाथियों द्वारा लोगों की मौतें हुई हैं वहीं 8 माह में 8 हाथी मारे जाने की घटना घटित हुई है। 2 दिन पूर्व कोरबा के बेला में बिजली करेंट से मारे गये शावक तथा उनकी मां की अगर पहचान होती तो हम यह समझ पाते कि वह किस परिवार की थी, किन परिस्थितियों में परिवार से बिछुड़ी? सामान्यतः मादा हथनी अपने परिवार में ही रहती है, बिछुड़ने की परिस्थिती में कुछ ही घण्टों में परिवार से वापस जुड़ जाती है।

समस्या निवारण के लिए हाथी के दृष्टिकोण से भी देखे

सुझाव प्रेषित करते हुए यह उल्लेखित किया है कि समस्या को वन हाथियों के दृष्टिकोण से देखना चालू करना होना चाहिये। अभी तक हम समस्या को सिर्फ मानव के दृष्टिकोण को आगे रखकर और प्राथमिकता देकर, देखते आये है। वन हाथियों की समस्या को पहले देखा जावे तो समाधान मिलेगा; उनकी समस्या है उनके जंगलों का टुकड़े-टुकड़े हो जाना, उनके जंगलों में अतिक्रमण हो जाना, पट्टे बांटा जाना, उनके जंगलों को GDP बढ़ाने के लिये वन विभाग द्वारा बिना किसी आपत्ति के खुले दिल से दिया जाना इत्यादि। घने जंगलों में बनी झोपड़ियों में जब पौष्टिक आहार जैसे चावल, धान होगा तो बुद्धिमत्ता रखने वाला हाथी उसे क्यों नहीं खायेगा? यह वैसा ही है जैसे कि एक तरफ खाने के लिये केक रखा हो दूसरी तरफ अरूचिकर खाद्य पदार्थ।

सुझाव प्रेषित करते हुए रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी से मांग की है कि वन हाथियों की पहचान करने के लिए तत्काल बजट की व्यवस्था कर वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग लिया जाना चाहिए।

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