July 5, 2022

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21,000 रुपये की सागौन की तस्करी डीआईजी को पड़ी भारी , नौकरी से बर्खास्तगी का नोटिस जारी…

रायपुर, 23 अक्टूबर 2021, जिम्मेदार पद पर रहते हुए वन से सागौन की लकड़ी की तस्करी एक डीआईजी को भारी पड़ गया। नौकरी से ही हाथ धोना पड़ रहा है।

दरअसल दिसंबर 2020, में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के ग्राम टोटल भारी में इक्कीस हजार रुपये की सागौन तस्करी करवाने के मामले में दोषी पाए जाने पर आईटीबीपी के डीआईजी को भारत सरकार गृह मंत्रालय के आईटीबीपी इंस्पेक्टर जनरल ने बर्खास्तगी का शो कॉज नोटिस जारी किया है।

दिनांक 26 दिसंबर 2020 को रात को 8:00 बजे राजनांदगांव के ग्राम टोटलबाहरी के ग्रामीणों ने आइटीबीपी का एक ट्रक पकड़ा जिसमें 14 सागौन के लट्ठे ले जाए जा रहे थे। मामले ने तूल पकड़ा और वन विभाग तथा पुलिस विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे वन विभाग ने पीओआर क्रमांक 3571, 26/12/2020 दर्ज करके रुपए 10,000/- की पेनल्टी लगा के जवानों को छोड़ दिया था।

आईटीबीपी ने इस मामले में कोर्ट ऑफ इंक्वायरी बैठाई जिसमें 36 गवाहों के और आठ बचाव पक्ष के गवाहों का साक्ष्य लिया गाय।
आईटीबीपी ने जांच में पाया कि तत्कालीन डीआईजी एंटी नक्सल ऑपरेशन राजनांदगांव छोटा राम जाट ने 5 जवानों को टोटल भारी गांव में शासकीय भूमि पर रखें 14 लट्ठों को लाने के लिए आइटीबीपी के 44 वीं बटालियन के ट्रक में भेजा। सागौन के लट्ठे वहां से एक प्राइवेट फार्म हाउस में ग्राम पटेरा तहसील दुमका जिला राजनांदगांव ले जाए जाने थे।

कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में पाया गया कि तत्कालीन डीआईजी छोटा राम जाट अवैध गतिविधियों मे लिप्त रहे तथा अवैध तरीके से अर्जित की गई प्रतिबंधित सागौन लकड़ी के ट्रांसपोर्टेशन में लिप्त रहे। यह भी पाया गया कि छोटा राम जाट के कारण से आईटीबीपी के 5 जवानों के जीवन के साथ समझौता किया गया तथा नक्सल क्षेत्र में बिना सुरक्षा के भेजा गया जोकि स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का उल्लंघन है। आईटीबीपी गृह मंत्रालय की तरफ से इंस्पेक्टर जनरल छोटा राम जाट को नोटिस जारी किया है जिसमें बताया गया है कि उनको नौकरी से निकालना प्रस्तावित किया गया है। आईटीबीपी एप्स के रूल के तहत 15 दिनों का शो कॉज नोटिस जारी किया गया है।

आईटीबीपी ने एक साल के भीतर की कार्यवाही, जबकि राज्य में सालों साल से पड़े है मामले

यह काबिले तारीफ़ है कि आईटीबीपी ग्रह मंत्रालय भारत सरकार ने उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए एक साल के भीतर न सिर्फ जांच पूरी कर ली बल्कि आरोपित डीआईजी रैंक के अधिकारी को नौकरी से बर्खास्तगी का नोटिस भी जारी कर दिया है। जबकि अगर राज्य में देखा जाये तो कई ऐसे गंभीर मामले है जिसमे सालों साल तक जाँच और निर्णय लंबित है और अधिकारी आराम से नौकरी कर रहे है। हाल ही में हाई कोर्ट बिलासपुर ने ईओडब्लू से लबित प्रकरणों की सूची तलब की थी। जिसमे कई मामले सालों साल से सिर्फ जांच के लिए पेंडिंग है।

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