September 22, 2021

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अब हर साल लगाना पड़ेगा लंबा लॉक डाउन?( वर्ल्ड अर्थ डे पर विशेष)

संपादकीय.

ब्यास मुनि द्विवेदी, लांसेट कमीशन के अनुसार पृथ्वी का तापमान औद्योगिक युग चालू होने वाले वर्ष 1870 के औसत तापमान से 1.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है. 1870 में यह 14 डिग्री था, 150 वर्षों में 2020 तक यह 15 डिग्री हो गया. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 10 सालों में 2030 तक यह 1.5 डिग्री बढ़ जाएगा, जो कि डेंजर की स्थिति होगी.

सभी ग्लेशियर का बर्फ, समुद्री आइस शीट का बर्फ, ग्रीनलैंड का बर्फ पिघलने से तापमान और समुद्र सतह बढ़ेगी. जलवायु परिवर्तन में तीव्रता आएगी. मानसून तीव्र होने लग जावेगा बाढ़ो की तीव्रता और संख्या बढ़ जाएगी. साल 2100 तक एवरेस्ट और हिमालय के हजारों ग्लेशियर 100% पिघल जाएंगे जिससे 12 महीने बहने वाली नदियां सूख जाएंगी, पनबिजली उत्पादन कम होगा और अकाल पड़ने से खाद्यान समस्या उत्पन्न होगी. गरीब सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. विश्व के पर्माफ्रोस्ट घटने लगेंगे.

क्या है पर्माफ्रोस्ट
आपको बता दें कि पर्माफ्रोस्ट विश्व के उन स्थानों को बोलते हैं जहां पर बहुत ठंड पड़ती है. बर्फ कड़क हो जाती है. पेड़ पत्तियां गिरने के बाद और जीव जंतु दफन होने के बाद सड नहीं पाते. अलास्का के पर्माफ्रोस्ट घटने लगे हैं. वायुमंडल में जितनी कार्बन डाइऑक्साइड है उससे दुगनी कार्बन डाइऑक्साइड पर्माफ्रोस्ट मैं दबी हुई है, पर्माफ्रोस्ट घटने से यह कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन बंद कर वायुमंडल में जाकर ग्रीनहाउस गैस का काम करेगी और जलवायु परिवर्तन में तीव्रता आएगी.

हर साल आएंगे नए नए ख़तरनाक वायरस-डॉ माइकल

मेडिसिन के नोबेल विजेता डॉ माइकल हेयटन ने चेतावनी जारी कर कहा है कि पर्माफ्रोस्ट में करोड़ों वायरस दफन है. पर्माफ्रोस्ट के घटने से यह करोड़ों वायरस सक्रिय हो जाएंगे. जिससे नई महामारिया पैदा होगी. मास्क तो जीवन भर लगाना पड़ेगा. डॉक्टर हेयटन की चेतानी को समझें तो करोना के समान नई महामारिया जल्दी जल्दी आएंगी और तब हर साल लंबी अवधि का लॉकडाउन लगाना पड़ेगा. डॉक्टर होटन के अनुसार हम क्लाइमेट चेंज को नजरअंदाज नहीं कर सकते.

यह क्लाइमेट चेंज नहीं क्लाइमेट क्राइसिस है, विनाश के लिए यंग जनरेशन भी जिम्मेदार होगी

जलवायु परिवर्तन की चिंता रखने वाले रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने बताया कि इसे क्लाइमेट चेंज कहना नाइंसाफी है, अब क्लाइमेट क्राइसिस आ गई है. ग्लोबल वार्मिंग नहीं ग्लोबल हीटिंग हो गई है. वर्ष 2040 तक तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा तब आपदा ( डिजास्टर) आएगी. हम इस क्राइसिस को कम नहीं कर सकते परंतु इस क्राइसिस से होने वाली आपदा को रोक सकते हैं. हमारी पीढ़ी इसके लिए जिम्मेदार है परंतु नई जनरेशन भी क्लाइमेट क्राइसिस को समझने के लिए और जिमेदारी उठाने के लिए तैयार ही नहीं है. वह राजनीतिज्ञों के कहने पर स्पीड अप में लगी है. नई जनरेशन को आगे आकर के राजनीतिज्ञों से मांग करनी पड़ेगी की क्लाइमेट क्राइसिस के मुख्य कारक कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन इत्यादि ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में तत्काल कमी की जावे. नई जनरेशन मांग करें कि वह कार्बन उत्सर्जन करने वाले अनवांटेड डेवलपमेंट और अनवांटेड गतिविधियां नहीं चाहते, क्योंकि सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन सरकारी योजनाओं और गतिविधियों के कारण होता है. नई जनरेशन को ही आगे आकर समाज को और नागरिकों को बताना पड़ेगा कि क्लाइमेट क्राइसिस को कम करने के लिए क्या किया जा सकता है. सिंघवी ने कहा कि उन्हें बहुत दुख होता है जब वह अपनी खुद की पीढ़ी और यंग जनरेशन से क्लाइमेट क्राइसिस के बारे में चर्चा करते हैं. कोई भी कुछ भी करने को तैयार नहीं है क्लाइमेट क्राइसिस पर चर्चा करने पर वे टीवी चालू करना ज्यादा पसंद करते हैं. नई जनरेशन राजनीतिज्ञों के इस छलावे से खुश है कि राजनीतिज्ञों कुछ कर रहे है, बिना कार्बन उत्सर्जन करने वाली गाड़ियां ला रहे है. जबकि उन्हें राजनीतिज्ञों से पूछना चाहिए कि इलेक्ट्रिक व्हीकल से कितने प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन कम होगा? अभी तक पूरे देश में सोलर बिजली क्यों नहीं लाई गई? इससे लगता है कि कुछ करने की बजाये आने वाली पीढ़ी संतापकारी कष्टों को झलने के लिए तैयार है. सिंघवी ने कहा कि अमीरों को आगे आकर अपना उत्सर्जन कम करना पड़ेगा. क्लाइमेट क्राइसिस, क्लाइमेट आपदा और महामारिया अमीरी गरीबी नहीं देखेगी.

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