September 22, 2021

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छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु संकट में: वन विभाग जो वन भैंसे पकड़कर लाये वो भी निकलीं देशी …। मेनका, रम्भा से ही थी अंतिम उमीदें, दोनों ने किया ना उम्मीद…।

रायपुर , 28 अगस्त 2029 , छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वन भैसा है लेकिन छत्तीसगढ़ में ही अब इसके अस्तित्व पर खतरा मडरा रहा है। वन विभाग दो वन भैंस मेनका और रम्भा को पकड़ कर लाये थे लेकिन इन दोनों की डीएनए रिपोर्ट आने के बाद अब शुद्ध मादा वन भैंस छत्तीसगढ़ में एक भी नही बची है।

क्या है संकट?
छत्तीसगढ़ में वन भैसा बचाने के लिए वन विभाग ने आशा नाम की वन भैंस उदंती अभ्यारण क्षेत्र के ग्राम बम्हनीझोला से ग्रामीण चेतन के यहाँ से जनवरी 2007 में पकड़ कर लाये थे। उस वक्त ग्रामीणों और वन विभाग में काफी विवाद हुआ था। ग्रामीण अपनी पालतू भैंस बता रहे थे। मीडिया में भी मामला उछला था। ऐसा माना जाता है कि यह आखिरी मादा वन भैस थी। आशा और वन भैसा छोटू से वन विभाग ने उदंती में वन भैसा प्रजनन केंद्र में रखकर ब्रीडिंग कराई जिससे 5 नर और एक मात्रा मादा भैंसा पैदा हुई। मादा वन भैंस मात्र एक ख़ुशी पैदा हुई।

आशा से पैदा हुए बच्चे
1. राजा
2. प्रिंस
3. मोहन
4. वीरा
5. सोनू
6. ख़ुशी (मादा)

ख़ुशी से पैदा हुए बच्चे
1. आनंद

वर्तमान में दोनों मादा आशा और ख़ुशी की मृत्यु हो चुकी है। आशा कि मृत्यु फरवरी 2020 में हुई थी, जबकि ख़ुशी कि मृत्यु इसी माह हुई है। जिसके बाद कोई भी मादा वन भैंस नही बची है।

आशा से क्लोन करके पैदा किया “दीप आशा” वो भी निकली मुर्रा
वर्ष 2014 में वन विभाग ने हरियाणा के करनाल में क्लोनिंग करके आशा से मादा भैस पैदा करने कि कोशिश किया लेकिन पैदा हुई दीप आशा “मुर्रा भैस” निकली। इस काम में भी विभाग ने करोडो रुपये खर्च किये लेकिन सफलता नही मिली।

रम्भा और मेनका को पकड़ कर लाये कुनबा बढ़ने, ये भी निकली देशी
वन विभाग ने सभी कोसिस नाकाम होते देख सीतानदी उदंती क्षेत्र के गांव से मई और सितम्बर 2018 में मेनका और रम्भा नाम कि दो मादा भैस पकड़कर लाये थे। बाड़े में लाने के बाद इन दोनों से अक्टूबर और नवंबर 2018 में ही भानुमति और मालती नाम के बच्चे भी पैदा हुए। इसका मतलब दोनों लाने के पहले ही दोनों के पेट बच्चे थे। ऑक्टूबर 2019 में रम्भा और मेनका दोनों का डीएनए टेस्ट कराने Centre for Cellular and Molecular Biology (CCMB) टेस्ट सेंटर हैदराबाद भेजा गया, डीएनए रिपोर्ट में ये दोनों भी शुद्ध वन भैसा नही निकली रिपोर्ट के अनुसार इनमे घरेलु भैंस की वंशावली पाई गयी हैं।

इस रिपोर्ट के आने के बाद छत्तीसगढ़ में एक भी शुद्ध रक्तता वाली मादा वन भैस नही बची है ऐसे में राजकीय पशु पर वन भैसा पर संकट आ गया है कि आगे का कुनबा कैसे बढ़ेगा।

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