October 22, 2021

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छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा हाथियों को जंगल में धान खिलाना पड़ा महॅगा …… भारत सरकार ने तत्काल मांगी विस्तृत रिपोर्ट ……. एक ही दिन में तीन विभागों ने महगी धान खरीद कर खिलाने का लिया था निर्णय ….

रायपुर, 29 सितम्बर 2021, छत्तीसगढ़ वन विभाग मानव-हाथी द्वंद नियंत्रित करने में पूर्णता असफल हो गया है. दिनों दिन जन-धन हानि बढ़ रही है. अनुभव की कमी के कारण जितना ही प्रयोग वन विभाग करने जाता है वह उल्टा पड़ जाता हैं. ऐसे ही एक मामले में जंगल में हाथियों को धान खिलाने पर अब वन विभाग को जवाब देना कठिन हो रहा है। मामला भारत सरकार के संज्ञान में आया. भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को पत्र क्रमांक एफ-2-11/2020 पी.ई. दिनांक 13 सितम्बर 2021 लिखकर मामले में तत्काल ही विस्तृत रिपोर्ट ईमेल से भेजने के लिए निर्देशित किया है.

क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ने मानव-हाथी द्वंद कम करने के लिए निर्णय लिया कि हाथियों के गांव में प्रवेश करने से पूर्व जंगल ही में उनके भोजन हेतु धान उपलब्ध करा दिया जाए ताकि वे गांव की तरफ धान की खोज में ना आए और वह जंगल के अंदर ही रहे.

एक दिन में ही महगी धान खरीदी का कई विभागों ने लिया निर्णय
हाथियों को धान खिलाने का आइडिया आते ही 22 जुलाई 2021 में खाद्य, नागरिक आपूरित एवं उपभोक्ता विभाग मंत्रालय को धान उपलब्ध कराने के लिए वन विभाग ने पत्र लिखा, कि भुगतान वन विभाग द्वारा किया जाएगा। उसी दिन खाद्य, नागरिक आपूरित एवं उपभोक्ता विभाग मंत्रालय ने मार्कफेड को पत्र लिखा, ठीक उसी दिन 22 जुलाई 2021 मार्कफेड ने भी पूरी तत्परता से कार्य करते हुए 22 संग्रहण केंद्रों से रुपए 2095 प्रति क्विंटल की दर से धन उपलब्ध कराने के लिए सहमति दे दिया. वैसे तो एक विभाग की चिट्ठी दूसरे विभाग में पहुंचने में महीनों लग जाते हैं परंतु खाद्य विभाग एवं मार्कफेड ने इतनी तत्परता क्यों दिखाई ये तो विभाग ही जाने?? कुछ स्थानों में हाथियों को सफलतापूर्वक धान खिलाएं जाने के समाचार भी वन विभाग ने प्रकाशित करवाकर वह वाही लूटने का प्रयत्न किया. आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में मोटा धान की नीलामी 1350/- एवं पतला धान की नीलामी 1400/- रुपये प्रति क़्वींटल में की गई। अब सवाल उठ रहे कि वन विभाग ने इतनी महगी धान खरीदी में तत्परता क्यों दिखाई??

हाथी को धान खिलाने में विशेषज्ञों ने क्यों जताई थी आपति?

छत्तीसगढ़ में हाथियों को जंगल में धान खिलने के मामले ने राष्ट्रिय ध्यान आकर्षित किया था. प्रदेश के ही नहीं पूरे देश के हाथी प्रबंधन के विशेषज्ञों ने हाथियों को जंगल में धान परोसने पर आपत्ति जताई थी. विशेषज्ञों का कहना था कि धान हाथियों का प्राकृतिक खाना नहीं है बल्कि वे चावल की सुगंध से आकर्षित होते हैं, परंतु ध्यान नहीं खा पाते क्योंकि उन्हें धान की नोक चुभती है. विशेषज्ञों का कहना था कि इस प्रकार के कदम से अगर हाथी धान खाने का आदी हो जाएगा तो वह बार-बार धान खाने के लिए गांव की तरफ आएगा और तब मानव हाथी द्वंद और बढ़ जाएगा, यह उसी प्रकार होगा जैसे कि किसी बच्चे को चॉकलेट खाने की लत लग जाती है. दूसरी चिंता विशेषज्ञों ने जाहिर की थी कि अगर जंगल में धान बरसात पानी गिरने से सड़ जाता है तो हाथी के साथ दूसरे वनजीव, ग्रामीणों कि गाय बैल जो चरने जाती है सड़े धान को खाकर बीमार हो सकते है. यह वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध भी है. भारत सरकार पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के द्वारा जारी हाथी मानव बंद मैनेजमेंट की बेस्ट प्रैक्टिस में भी इस प्रकार का कोई सुझाव नहीं दिया गया है.

एक दिन में तीन विभाग ने लिया था निर्णय, अब 15 दिनों बाद भी जवाब देने में छूट रहा पसीना,

भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हाथियों को धान खिलाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को पत्र क्रमांक एफ-2-11/2020 पी.ई. दिनांक 13 सितम्बर 2021 लिखकर मामले में तत्काल ही विस्तृत रिपोर्ट ईमेल से भेजने के लिए निर्देशित किया है जिस पर पी वी नरसिंह राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) से एसजी न्यूज़ ने जवाब रिपोर्ट के बारे में जानकारी चाही जिस पर उन्होंने कहा रिपोर्ट के बारे में मेरे को नहीं मालूम, ऑफिस से बाहर हूँ , लेटर आया होगा, पुटअप हो रहा होगा , जानकारी इकठ्ठा कर रहे होंगे, फील्ड से………।

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