October 5, 2022

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RSS को लोकसभा चुनाव की चिंता सताने लगी ,बनाया भारतीय जन फाउंडेशन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा के सफाया के साथ ही राजस्थान और मध्यप्रदेश में मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अब नाराज भाजपाइयों को एक मंच पर एकजुट करने की रणनीति बनाई है। भारतीय जन फाउंडेशन के जरिए यह काम होगा।

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ(आरएसएस) ने अनुषांगिक संगठनों की श्रेणी में एक और नया संगठन तैयार कर लिया है। भारतीय जन फाउंडेशन । फाउंडेशन के बैनर तले उन कार्यकर्ताओं और पूर्व पदाधिकारियों को जोड़ा जाएगा जो या तो घर बैठ गए हैं या फिर सत्ता में रहने के दौरान संगठन और सत्ता ने दरकिनार कर दिया था।

उपेक्षित महसूस करने वाले ऐसे पदाधिकारी व कार्यकर्ता जिनका ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों में अच्छी खासी दखल है और जिनकी बातों को लोग गंभीरता से सुनते हैं ऐसे लोगों को संपर्क कर उनकी बातें सुनना और उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिशें संघ के दिग्गजों ने शुरू कर दी है।

संघ की कार्यप्रणाली भाजपा से एकदम अलग है। बिना किसी शोरगुल के अपनों से संपर्क करना,उनके घर जाकर बात करना,उनकी बातों को सहजता और गंभीरता के साथ सुनने के बाद अपनी बात रखने की इनकी अपनी अलग कार्यशैली है। खास बात ये कि नाराज कार्यकर्ताओं को उनकी बात रखने का पूरा-पूरा अवसर देने के अलावा उनकी भड़ास निकालने का काम किया जाता है।

नाराजगी जब दूर हो जाती है और शिकायतों का सिलसिला जब थम जाता है तब संघ के दिग्गज अपना काम शुरू करते हैं। समाज और राष्ट्र के साथ ही पार्टी का हवाला देते हुए एक बार फिर काम करने की अपील अपने पुराने कार्यकर्ताओं से करते हैं। संगठन को मजबूत बनाने के अलावा अपनों को जोड़े रखने में संघ का कोई जवाब नहीं है।

यही कारण है कि तीन प्रमुख हिन्दी भाषी प्रांत में भाजपा की करारी हार के बाद भाजपा से पहले संघ ने डैमेज कंट्रोल की रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। संघ ने अपने एक प्रमुख अनुषांगिक संगठन को एक बार फिर सक्रिय करने की योजना बनाई है। भारतीय जन फाउंडेशन के बैनर तले भाजपा के नाराज व घर बैठे कार्यकर्ताओं को जोड़ने का निर्णय लिया है।

संघ के एक दिग्गज प्रांतीय पदाधिकारी की मानें तो राजस्थान के बाद छत्तीसगढ़ में भारतीय जन फाउंडेशन की नींव रखी जा रही है। इसकी ब्लू प्रिंट तैयार कर ली गई है। छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में संगठन खड़ा करने का खाका तैयार कर लिया गया है। संगठन में उन चेहरे को आगे रखने की योजना है जिनको पूर्व में संगठन चलाने का अच्छा खास अनुभव है।

सामाजिक समरसता टीम को सक्रिय करने की रणनीति

संघ के रणनीतिकारों ने सामाजिक समरसता के जरिए गांव-गांव में अपनी अलग पहचान बनाई है। इसी अनुषांगिक संगठन के जरिए अच्छी खासी पैठ भी बनी है। भारतीय जन फाउंडेशन को प्रभावी बनाने और पुराने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए संघ अपनी सामाजिक समरसता की टीम को आगे करने की रणनीति पर गंभीरता के साथ विचार कर रहा है।

भाजपा से अलग,पर काम भाजपा के लिए

भारतीय जन फाउंडेशन पूरी तरह संघ के नियंत्रण वाला संगठन होगा। भाजपा से इसका कोई लेना देना नहीं होगा। पर यह संगठन लोकसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों को जिताने के लिए काम करेगा। चुनाव के दौरान फाउंडेशन का नियंत्रण संघ के हाथ में होगा। इनके इशारे पर ही पदाधिकारी अपने काम को अंजाम देंगे ।

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