September 22, 2021

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वाह छत्तीसगढ़ वन विभाग!!!! घायल बाघिन का इलाज सरपंच करेंगे??? घायल बाघिन के दिन प्रतिदिन की हेल्थ और ट्रीटमेंट मॉनिटरिंग हेतु बनाई एक्सपर्ट टेक्निकल समिति में सरपंच सदस्य

रायपुर, 25 जून 2021, अचानकमार टाइगर रिजर्व में एक घायल बाघिन 8 जून को रेस्क्यू की गई. जिसे कि कानन पेंडारी जू बिलासपुर में रखा गया है. घायल बाघिन के इलाज से पल्ला झाड़ने के लिए वन विभाग ने अब एक नायाब तरीका ढूंढा है. बाघिन के घायल मिलने के 14 दिन पश्चात 22 जून को वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी ने बाघिन के दिन प्रतिदिन हेल्थ और ट्रीटमेंट मॉनिटरिंग और तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिए 7 सदस्य समिति गठित की है, जिसमें पशु चिकित्सा का जानकार सिर्फ एक ही व्यक्ति है.

कौन-कौन है समिति में?

समिति मैं अध्यक्ष अचानकमार टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर है जोकि भारतीय वन सेवा से हैं जिन्हें पशु चिकित्सा के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

दूसरे व्यक्ति डायरेक्टर वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून के प्रतिनिधि है. जरूरी नहीं है कि देहरादून से पशु चिकित्सा का ज्ञान रखने वाले प्रतिनिधि आए. वैसे जानकार प्रश्न उठा रहे हैं कि दिन प्रतिदिन हेल्प और ट्रीटमेंट का ध्यान रखने के लिए देहरादून से बाघिन के इलाज के लिए करोना काल में प्रतिनिधि आएंगे या नहीं? और आएंगे तो कितनी बार?

तीसरे सदस्य के रूप में पशुधन विकास विभाग के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ पी के चंदन को रखा गया है. यह कानन पेंडारी बिलासपुर में तभी जा पाएंगे जबकि पशुधन विकास विभाग के डायरेक्टर इन्हें अनुमति दें. लालफीताशाही के चलते यह अनुमति कब मिलेगी कोई नहीं जानता.

समिति के चौथे और पांचवें सदस्य एनजीओ से संबंध रखते हैं जिनमें से एक को तात्कालिक रूप से एनटीसीए का प्रतिनिधि बनाया गया है. पशु चिकित्सा से दोनों का कोई संबंध नहीं है.

छठे सदस्य के रूप में ग्राम पंचायत अचानक मार्ग के पंचायत सरपंच को रखा गया है. इनका भी पशु चिकित्सा से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है.

समिति के सातवें सदस्य अचानकमार टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर हैं जो कि आई एफ एस है जिनका भी पशु चिकित्सा से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है.

वन विभाग की कार्यवाही शंका पैदा कर रही है

वन्यजीव प्रेमी बाघिन के मामले में वन विभाग द्वारा रखी जा रही गंभीर चुप्पी और गोपनीयता को लेकर पहले से ही शंका में है. विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बाघिन के एक पंजे में भी घाव है जो कि अभी तक नोटिस नहीं किया गया है, जो कि किसी बुलेट का भी हो सकता है. क्षेत्र में चर्चा है कि जिस इलाके में बाघिन पाई गई वहां के कुछ लोग अवैध शिकार में लिप्त रहते हैं और बाघिन चोटिल होने के पूर्व ट्रैप में फस गई थी. बाघिन की उम्र को लेकर भी शंका है. वन विभाग द्वारा बाघिन की उम्र 12 वर्ष बताई जा रही है जबकि जानकार कहते हैं कि बाघिन की उम्र बहुत कम है तथा वन विभाग अभी से अपने बचाव के लिए बाघिन की उम्र ज्यादा बता रहा है.

क्या कहते हैं वन्य जीव प्रेमी

इस संबंध में वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि यह समाचार प्रकाशित होने के बाद की बाघिन को पुनः जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी से मुलाकात की थी तथा स्वास्थ्य का ध्यान रखने हेतु विशेष निवेदन किया था ताकि बाघिन को जल्दी से जल्दी पुनः जंगल में छोड़ा जा सके.

गठित की गई समिति के संबंध में उन्होंने बताया की बाघिन के इलाज और स्वास्थ्य का ध्यान रखना पशु चिकित्सकों का कार्य है. बाघिन को पुनः कब जंगल में छोड़ा जा सकता है यह निर्णय भी वन्यजीव के अनुभवी पशु चिकित्सक ही ले सकते हैं. इस समिति में सरपंच और अन्य बाकी के इलाज के लिए क्या तकनीकी मार्गदर्शन दे सकते हैं, समझ के परे है. उन्होंने बताया कि डॉ. चंदन के अलावा छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के इलाज का 13 साल का अनुभव डॉक्टर जय किशोर जड़िया भी है जिन्हें भी पशुधन विकास विभाग से बुलाया जाना चाहिए और इलाज के लिए दूरभाष पर डायरेक्टर पशुधन विकास से तत्काल अनुमति लेनी चाहिए.

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